रवि, 18 अक्टू. 2026

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9/11 के 25 साल: अमेरिकी 'वॉर ऑन टेरर' में 45 लाख मौतें, $8 ट्रिलियन स्वाहा

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11 सित. 2026, 07:12 AM 4 मिनट में पढ़ें 2

9/11 अमरीका
9/11 अमरीका

नई दिल्ली । डेस्क: वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और पेंटागन पर हुए भयानक आतंकवादी हमलों के 25 साल बीत चुके हैं. 19 अल-कायदा आतंकवादियों द्वारा चार यात्री विमानों को अगवा कर किए गए इस हमले में लगभग 3,000 बेकसूर लोग मारे गए थे. हालांकि, इस घटना के बाद अमेरिका द्वारा शुरू की गई सैन्य कार्रवाइयों ने पूरी दुनिया की भू-राजनीति और वॉशिंगटन की विदेश नीति को हमेशा के लिए बदलकर रख दिया. 2001 के बाद से अमेरिका ने अपनी सैन्य ताकत का इस्तेमाल जिस पैमाने पर किया, उससे वैश्विक स्तर पर लाखों जिंदगियां तबाह हो गईं.


ब्राउन यूनिवर्सिटी के 'कॉस्ट्स ऑफ वॉर' प्रोजेक्ट के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, post-9/11 की अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 45 लाख से 47 लाख लोगों की जान जा चुकी है. इनमें से लगभग 9.4 लाख मौतें सीधे तौर पर युद्ध, बमबारी और गोलीबारी में हुई हैं, जबकि 36 से 38 लाख लोग कुपोषण, बीमारियों और स्वास्थ्य सेवाओं के ध्वस्त होने के कारण काल के गाल में समा गए.

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अफ़गानिस्तान और इराक़ में तबाही का खौफनाक मंज़र


7 अक्टूबर 2001 को अमेरिका ने अफ़गानिस्तान में 'ऑपरेशन एंड्योरिंग फ्रीडम' की शुरुआत की. तालिबान सत्ता से बेदखल जरूर हुआ, लेकिन यह संघर्ष 20 साल तक खींच गया, जो अमेरिकी इतिहास का सबसे लंबा युद्ध बना. इस दौरान अफ़गानिस्तान में लगभग 1,76,000 लोग सीधे तौर पर मारे गए. युद्ध के कारण देश में खाद्य असुरक्षा का स्तर 62 प्रतिशत से बढ़कर 92 प्रतिशत तक पहुंच गया. अंततः 2021 में अमेरिकी सेना की वापसी के साथ तालिबान ने पुनः नियंत्रण हासिल कर लिया.


इसके ठीक दो साल बाद, 19 मार्च 2003 को अमेरिका ने सामूहिक विनाश के हथियारों का झूठा बहाना बनाकर इराक़ पर आक्रमण किया. इस युद्ध ने 3,15,000 से अधिक इराकियों की बलि ले ली और बगदाद जैसे ऐतिहासिक शहरों को मलबे के ढेर में बदल दिया.


सीक्रेट एयर स्ट्राइक्स और 3.8 करोड़ लोगों का विस्थापन


जमीनी लड़ाइयों के अलावा, अमेरिका ने पाकिस्तान, यमन, सोमालिया, सीरिया और लीबिया में लगातार हवाई व ड्रोन हमले किए. 'ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म' के अनुसार, अकेले पाकिस्तान में 423 अमेरिकी ड्रोन हमलों में 4,000 से अधिक लोग मारे गए. वहीं, सीरिया और इराक़ में आईएसआईएल (ISIL) के खिलाफ अभियान में हजारों आम नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी.


इन सैन्य अभियानों का सबसे भयावह सामाजिक असर बड़े पैमाने पर हुए विस्थापन के रूप में सामने आया. आंकड़ों के अनुसार, अफ़गानिस्तान, इराक़, पाकिस्तान, यमन और सीरिया समेत आठ देशों के 3.8 करोड़ से अधिक लोग अपने घरों को छोड़ने पर मजबूर हुए. आज दो दशक बाद भी ये लोग शरणार्थी शिविरों और देशों के बीच भटकने को मजबूर हैं.


खुद अमेरिका पर आर्थिक और मानसिक चोट


इस अंतहीन युद्ध की भारी कीमत खुद अमेरिकी सैनिकों और वहां की अर्थव्यवस्था को भी चुकानी पड़ी है. अफ़गानिस्तान और इराक़ युद्ध में 6,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक मारे गए और लगभग 50,000 से ज्यादा घायल हुए. इसके अलावा, युद्ध से लौटे सैनिकों में मानसिक तनाव इस कदर बढ़ा कि प्रत्यक्ष युद्ध में मारे गए सैनिकों की तुलना में चार गुना अधिक पूर्व सैनिकों ने आत्महत्या कर ली.


वित्तीय मोर्चे पर, अमेरिका इस युद्ध पर अब तक 5.8 ट्रिलियन डॉलर खर्च कर चुका है. आगामी दशकों में पूर्व सैनिकों की देखभाल पर 2.2 ट्रिलियन डॉलर अतिरिक्त खर्च होने का अनुमान है, जिससे कुल लागत 8 ट्रिलियन डॉलर के पार चली जाएगी. विशेषज्ञों का मानना है कि 2030 तक अमेरिका युद्ध के कर्ज पर उतना ही ब्याज चुका रहा होगा, जितना उसने युद्ध लड़ने पर खर्च किया था.


अमेरिकी जनता में असंतोष और बदलती राजनीति


अमेरिका में आम जनता के बीच विदेशी जमीनों पर लड़े जाने वाले इन युद्धों को लेकर भारी आक्रोश है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'फॉरएवर वॉर्स' (कभी न खत्म होने वाले युद्ध) को समाप्त करने और शांति बहाल करने के वादों के साथ जनता का समर्थन हासिल किया था, लेकिन उनके कार्यकाल में भी यमन और सोमालिया जैसे देशों में हवाई हमले और कड़े किए गए. हाल के दिनों में ईरान के साथ उभरे तनाव और अन्य सैन्य कार्रवाइयों ने एक बार फिर अमेरिकी विदेश नीति की दिशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP