यूपी में SIR से 2.89 Cr वोटरों के नाम कटे, BJP 2027 चुनाव को लेकर चिंतित
लखनऊ । डेस्क: उत्तर प्रदेश में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया भारतीय जनता पार्टी के लिए गंभीर राजनीतिक चुनौती बनकर उभरी है. 12 राज्यों में लागू इस प्रक्रिया के तहत अब तक सबसे अधिक वोटरों के नाम उत्तर प्रदेश की ही ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए हैं. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाले इस राज्य में लगभग 2.89 करोड़ वोटरों के नाम सूची से बाहर हो चुके हैं.
इनमें बड़ा हिस्सा शहरी इलाकों का बताया जा रहा है, जिससे 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा के भीतर चिंता बढ़ गई है.
सूत्रों के मुताबिक, राजधानी लखनऊ में सबसे अधिक लगभग 30 प्रतिशत वोटरों के नाम ड्राफ्ट सूची से हटे हैं. इसके बाद गाजियाबाद में करीब 28 प्रतिशत वोटर बाहर हुए हैं.
इसके अलावा बलरामपुर, कानपुर, प्रयागराज, मेरठ, गौतम बुद्ध नगर, हापुड़, सहारनपुर और आगरा जैसे बड़े शहरों में भी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कटे हैं. पार्टी के आंतरिक विश्लेषण में यह बात भी सामने आई है कि मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भाजपा को अपेक्षाकृत अधिक वोट नुकसान हुआ है.
भाजपा के आकलन के अनुसार, कई विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी को लगभग 10 लाख वोटरों का नुकसान हुआ है. ये वही सीटें हैं, जहां 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा महज 5 हजार से 20 हजार वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर पाई थी.
ऐसे में यदि मतदाता सूची में यह स्थिति बनी रहती है, तो 2027 का विधानसभा चुनाव पार्टी के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकता है.
खतरे की आहट मिलते ही भाजपा नेतृत्व ने डैमेज कंट्रोल की रणनीति तेज कर दी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और वरिष्ठ नेताओं ने इस मुद्दे पर एक वर्चुअल बैठक की.
इस बैठक में सांसद, विधायक, एमएलसी, मंत्री, संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी और जिला अध्यक्ष शामिल हुए. इसके अलावा प्रदेश संगठन ने भी अलग से समीक्षा बैठक आयोजित की है.
बैठकों में पार्टी विधायकों को “युद्धकालीन स्तर” पर काम करने और इस मुद्दे को व्यक्तिगत चुनावी जिम्मेदारी के रूप में लेने का निर्देश दिया गया है. संगठनात्मक नेताओं से कहा गया है कि वे विधानसभा, मंडल और वार्ड स्तर पर फॉर्म-6 उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें, ताकि जिन वोटरों के नाम कटे हैं, उन्हें दोबारा सूची में जोड़ा जा सके. यह निर्देश सभी जिला अध्यक्षों, विधायकों, सांसदों और मंत्रियों पर समान रूप से लागू किया गया है.
पार्टी का स्पष्ट आदेश है कि जिन विधानसभा क्षेत्रों में स्थानीय सांसद या विधायक उपलब्ध नहीं हैं, वहां विधान परिषद और राज्यसभा सांसदों को जिम्मेदारी सौंपी जाए. संगठनात्मक नुकसान को रोकने के लिए लगातार निगरानी और फील्ड स्तर पर सक्रियता को अनिवार्य बताया गया है.
भाजपा नेतृत्व ने यह भी निर्देश दिया है कि पार्टी को किसी भी तरह के नुकसान से बचाने के लिए कार्यकर्ताओं और नेताओं को कड़ी मेहनत करनी होगी. केंद्रीय कार्यालय को दैनिक बूथ-स्तरीय रिपोर्ट भेजना अनिवार्य कर दिया गया है. इसके साथ ही शहरी मतदाताओं पर विशेष फोकस करने के निर्देश दिए गए हैं, क्योंकि सबसे ज्यादा नाम कटने की समस्या शहरों में ही सामने आई है.
जिला अध्यक्षों को 10 सदस्यों की टीम गठित करने और हर शाम दैनिक प्रगति रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया है. प्रचार और सुधार कार्य के दौरान सभी पदाधिकारियों को बूथ पर मौजूद रहने के लिए कहा गया है. पार्टी ने 17 जनवरी को इस पूरी प्रक्रिया की विस्तृत समीक्षा करने का भी निर्णय लिया है.
भाजपा सूत्रों के अनुसार, पूरी SIR प्रक्रिया पर निगरानी रखने के लिए पार्टी हाईकमान ने ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद के. लक्ष्मण को उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी है. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में संगठन और सरकार, दोनों स्तरों पर इस मुद्दे को लेकर गतिविधियां और तेज होंगी.
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश जैसे राजनीतिक रूप से अहम राज्य में मतदाता सूची से करोड़ों नाम कटना भाजपा के लिए एक बड़ा अलार्म साबित हुआ है.
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी इस नुकसान की भरपाई कर पाएगी या नहीं, यह आने वाले महीनों में जमीन पर होने वाले काम और मतदाता सूची के अंतिम आंकड़ों पर निर्भर करेगा.