ट्रंप के H-1B वीजा पर Dy CM का तंज: 'प्रार्थना है उन्हें सद्बुद्धि मिले'
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के H-1B वीजा प्रायोजन शुल्क को 100,000 डॉलर करने वाले कार्यकारी आदेश पर हास्य और व्यंग्य के साथ प्रतिक्रिया दी है. शर्मा ने कहा, "मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं और इंतजार करता हूं कि उन्हें कुछ सद्बुद्धि मिले."
ट्रंप का यह आदेश भारतीयों को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि H-1B वीजा धारकों में लगभग 70% भारतीय हैं, जिससे यह नीति उनके लिए विशेष रूप से प्रभावशाली है. इस आदेश के तहत कंपनियों को H-1B वीजा याचिकाओं के लिए प्रतिवर्ष 100,000 डॉलर का भुगतान करना होगा, जिसका उद्देश्य कथित दुरुपयोग को रोकना और अमेरिकी श्रमिकों को प्राथमिकता देना है.
वहीं, विपक्ष ने इस कदम की कड़ी आलोचना की है. कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए और दावा किया कि ट्रंप हर दिन भारत का अपमान कर रहे हैं.
खेड़ा ने कहा, "ट्रंप रोज हमें अपमानित कर रहे हैं, लेकिन पीएम चुप हैं. राहुल गांधी ने उन्हें सदन में यह कहने का मौका दिया था कि ट्रंप झूठे हैं. अगर उन्होंने ऐसा कहा होता, तो पूरा देश उनके साथ खड़ा होता. आज पूरा देश पीएम से सवाल कर रहा है."
वहीं, एसोसिएशन ऑफ वीजा एंड आईईएलटीएस सेंटर्स (AVIC) के अध्यक्ष बिक्रम छब्बल ने कहा कि इस कदम से भारतीय कामगारों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा.
उन्होंने बताया, "H-1B वीजा धारकों में 70% भारतीय हैं. उनके बाद चीनी और फिर अन्य देशों के लोग आते हैं. पहले कुल शुल्क 215 डॉलर था, जिसमें 750 डॉलर अतिरिक्त थे. अब यह शुल्क भारतीय रुपये में 88 लाख से ज्यादा हो गया है."
उन्होंने आगे कहा, "मुझे लगता है कि भविष्य में कंपनियों को काफी संघर्ष करना पड़ेगा. अगर किसी कंपनी को हर साल एक लाख डॉलर का शुल्क देना पड़े, तो कंपनियां इतना खर्च नहीं उठा पाएंगी."
इस भारी शुल्क के कारण, विशेष रूप से छोटी कंपनियां, विदेशी कर्मचारियों को प्रायोजित करने से हिचक सकती हैं, जिससे भारतीय प्रतिभाएं कनाडा या यूरोप जैसे विकल्पों की ओर रुख कर सकती हैं.
शुक्रवार को (स्थानीय समय) अमेरिकी राष्ट्रपति ने "रेस्ट्रिक्शन ऑन एंट्री ऑफ सर्टेन नॉनइमिग्रेंट वर्कर्स" नामक एक नया राष्ट्रपति उद्घोषणा जारी की, जिसमें H-1B वीजा कार्यक्रम में बड़े बदलाव किए गए हैं.
यह कदम अमेरिका के प्रौद्योगिकी और आईटी क्षेत्रों में नौकरी तलाश रहे भारतीयों को प्रभावित कर सकता है, जिसके कारण विपक्ष ने इसे अमेरिका की तकनीकी प्रतिभा पाइपलाइन के लिए संभावित रूप से नुकसानदायक बताया है.