तिरुपति मंदिर केस: 3 साल में 250 Cr का नकली घी, CBI चार्जशीट में खुलासा
नई दिल्ली । डेस्क: तिरुपति मंदिर के प्रसादी लड्डू मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने नेल्लोर की भ्रष्टाचार निरोधक अदालत में अपनी अंतिम चार्जशीट दाखिल कर दी है, जिसमें बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं. चार्जशीट के अनुसार, साल 2021 से 2024 के बीच मंदिर के लिए करीब 68 लाख किलो मिलावटी घी खरीदा गया था, जिसकी कुल लागत 250 करोड़ रुपये थी.
जांच में पाया गया कि जिस 'घी' का उपयोग लड्डू बनाने के लिए किया गया, वह असल में दूध या मक्खन से बना ही नहीं था, बल्कि उसमें भारी मात्रा में पाम ऑयल, पाम कर्नेल और एसिटिक एसिड एस्टर जैसे रसायनों का मिश्रण था.
CBI ने अपनी चार्जशीट में 36 लोगों को आरोपी बनाया है, जिनमें मंदिर प्रबंधन समिति (TTD) के नौ सदस्य और पांच डेयरी विशेषज्ञ शामिल हैं. जांच एजेंसी का दावा है कि उत्तराखंड की जिस डेयरी से यह घी मंगाया जाता था, उसने इन तीन वर्षों में घी बनाने के लिए एक बूंद दूध भी नहीं खरीदा था. इसके बजाय, दिल्ली के एक व्यापारी से लिए गए रसायनों और खाद्य सुगंधों की मदद से इसे बिल्कुल असली घी जैसा स्वाद और गंध दिया गया था.
नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) की रिपोर्ट के अनुसार, इस मिलावटी घी का गुणवत्ता सूचकांक (S-Value) केवल 19.72 पाया गया, जबकि मानक के अनुसार यह कम से कम 98 होना चाहिए.
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि घी की आपूर्ति के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले टैंकरों में पशु चर्बी के अंश मिले थे. आरोप है कि उन्हीं पुराने टैंकरों को साफ कर फिर से मिलावटी घी भरकर मंदिर भेजा जाता था.
चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि मंदिर के तत्कालीन अधिकारियों और विशेषज्ञों ने भारी रिश्वत लेकर इस मिलावट को नजरअंदाज किया और गुणवत्ता रिपोर्टों में हेराफेरी की.
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू द्वारा पिछली सरकार पर लगाए गए आरोपों के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर यह जांच शुरू की गई थी, जिसके निष्कर्षों ने अब पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है.