SC: आपराधिक इतिहास के आधार पर बेल नहीं रोकी जा सकती
नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि केवल आपराधिक इतिहास के आधार पर किसी आरोपी को जमानत से वंचित नहीं किया जा सकता, खासकर जब वे लंबे समय तक हिरासत में रह चुके हों.
जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली बेंच ने केरल हाई कोर्ट के 2024 के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें 2021 में केरल में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया के नेता के.एस. शान की हत्या के मामले में पांच आरोपियों की जमानत रद्द की गई थी.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट को यह ध्यान देना चाहिए था कि आरोपी 2022 में सत्र न्यायालय से जमानत मिलने से पहले एक साल से अधिक समय तक जेल में थे और इसके बाद दो साल तक जमानत पर रहे.
कोर्ट ने यह भी कहा कि जमानत रद्द करना तभी उचित है, जब आरोपी गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों से छेड़छाड़ करने की कोशिश करें.
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत को बहाल करते हुए यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी किए कि आरोपी मामले की सुनवाई में हस्तक्षेप न करें.