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पैलेट गन का इस्तेमाल मानवाधिकार उल्लंघन नहीं: CRPF का दावा

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31 अग. 2026, 05:30 PM 2 मिनट में पढ़ें 2

Pellete Gun
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नई दिल्ली । डेस्क: तृणमूल कांग्रेस के नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद साकेत गोखले ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) पर आरोप लगाया है कि उसने RTI के तहत मांगी गई जानकारी देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का इस्तेमाल मानवाधिकारों के उल्लंघन के दायरे में नहीं आता. गोखले ने कहा कि वह अर्धसैनिक बल के इस जवाब को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखेंगे और इस पर अदालत का रुख जानेंगे.


साकेत गोखले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा करते हुए बताया कि उन्होंने 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों के संसद मार्च के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) द्वारा पैलेट गन चलाए जाने को लेकर एक RTI आवेदन दायर किया था. 

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उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार CRPF को RTI अधिनियम से छूट प्राप्त है, लेकिन मानवाधिकार उल्लंघन या भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में यह छूट लागू नहीं होती.


इसके विपरीत, CRPF और उसकी अपीलीय अथॉरिटी ने अपने जवाब में कहा कि आवेदन में लगाए गए आरोप मानवाधिकारों के उल्लंघन से संबंधित अपवाद के तहत नहीं आते हैं.


गोखले ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले सरकार ने पैलेट गन के इस्तेमाल से पूरी तरह इनकार किया, फिर पीड़ितों की संख्या बताने से मना कर दिया और अब देश की राजधानी में निहत्थे युवाओं पर इसके इस्तेमाल को मानवाधिकार उल्लंघन मानने से इनकार किया जा रहा है, जो किसी भी सभ्य लोकतंत्र में हैरान करने वाला तर्क है.


इससे पहले, गोखले ने RTI के जरिए प्राप्त अस्पतालों के आंकड़ों के हवाले से दावा किया था कि 20 जुलाई की घटना में लेडी हार्डिंग अस्पताल में नौ और सफदरजंग अस्पताल में एक मरीज पैलेट गन की चोटों के इलाज के लिए पहुंचा था. वहीं, एम्स (AIIMS) ने व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा से जुड़ी धाराओं का हवाला देते हुए इस तरह के किसी भी विवरण को साझा करने से इनकार कर दिया था.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP