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पाक को थप्पड़, SCO में चीन के जरिए भारत की कूटनीतिक जीत

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02 सित. 2025, 11:58 PM 7 मिनट में पढ़ें 1

मोदी-पुतिन-पाक पीएम
मोदी-पुतिन-पाक पीएम

नई दिल्ली । डेस्क: महज दो महीनों में सब कुछ बदल गया. चीन यात्रा के दौरान पहलगाम आतंकी हमले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली. उनकी मौजूदगी में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के नौ सदस्य देशों ने जम्मू-कश्मीर के बसारन घाटी में हुए आतंकी हत्याकांड की कड़ी निंदा करते हुए संयुक्त बयान जारी किया. महत्वपूर्ण रूप से, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ को भी 'असुविधा' निगलते हुए इस पर सहमति जतानी पड़ी.


इस साल 1 सितंबर को SCO ने पहलगाम घटना पर संयुक्त बयान दिया. इसमें पाकिस्तान का नाम नहीं लिया गया, लेकिन संबंधित आतंकी हमले के समर्थकों के खिलाफ न्याय की मांग की गई. दूसरी ओर, विदेशी धरती पर इस कूटनीतिक सफलता का पूरा श्रेय अंतरराष्ट्रीय संबंध विशेषज्ञ चार लोगों को दे रहे हैं. इनमें प्रधानमंत्री मोदी के अलावा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल शामिल हैं.

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पिछले जून में चीन के किंगदाओ में SCO सदस्य देशों के रक्षा मंत्रियों की बैठक हुई. वहां राजनाथ सिंह मौजूद थे, लेकिन संगठन द्वारा तैयार संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया. कारण था कि इसमें पहलगाम हमले का कोई जिक्र नहीं था, जबकि पाकिस्तान बालोचिस्तान विद्रोहियों को आतंकवादी ठहराना चाहता था. नतीजतन, बैठक बिना संयुक्त बयान के समाप्त हुई.


किंगदाओ बैठक में राजनाथ ने सिर्फ प्रतीकात्मक विरोध दर्ज नहीं कराया. पाक रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ मुहम्मद के सामने ही आतंकवाद के मुद्दे पर इस्लामाबाद को बिना नाम लिए चेतावनी दी. उन्होंने कहा, "आतंकी हमलों के खिलाफ लड़ाई में दोमुंहा व्यवहार की कोई जगह नहीं है. जो आतंकवाद को अपने संकीर्ण स्वार्थों के लिए बढ़ावा देते और इस्तेमाल करते हैं, उन्हें इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा." उन्होंने SCO में इस मुद्दे पर कार्रवाई में संकोच न करने की बात भी कही.


SCO के प्रमुख सदस्यों में पाकिस्तान शामिल है. राजनाथ के भारत लौटने के बाद नई दिल्ली ने SCO संयुक्त बयान न होने के कारणों की व्याख्या की. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा, "भारत चाहता था कि दस्तावेज में आतंकवाद पर चिंता व्यक्त हो, लेकिन एक विशेष देश इसे स्वीकार नहीं कर पा रहा था. इसलिए बयान स्वीकार नहीं हुआ." केंद्र की मोदी सरकार ने इशारों में पाकिस्तान को इसका जिम्मेदार ठहराया.


अगस्त में चीनी विदेश मंत्री वांग यी भारत आए. नई दिल्ली में उन्होंने NSA डोभाल और विदेश मंत्री जयशंकर से द्विपक्षीय बैठक की. वहां सीमा संघर्ष और आतंकवाद के मुद्दे उठे. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए शुल्कों के कारण बीजिंग तब तक दबाव में था. सूत्रों के मुताबिक, भारत को करीब लाने के लिए ड्रैगन सरकार कितनी बेताब थी, यह वांग यी ने जाहिर किया.


31 अगस्त को चीन के तियानजिन शहर में SCO सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों की बैठक में मोदी शामिल हुए. पहले दिन ही चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से उनकी अलग से बात हुई, जो करीब 50 मिनट चली. बाद में विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने बताया कि बैठक में प्रधानमंत्री ने सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाया. उन्होंने समझाया कि आतंकी गतिविधियां दोनों पड़ोसी देशों को प्रभावित कर रही हैं.


मिश्री ने आगे कहा कि पाक समर्थित आतंकवाद रोकने के लिए भारत-चीन के संयुक्त प्रयास जरूरी हैं, जैसा मोदी ने जिनपिंग से कहा. विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारत के इस कड़े रवैये को चीन नजरअंदाज नहीं कर सका. नई दिल्ली का सहयोग पाने के लिए इस्लामाबाद से कुछ दूरी बनानी पड़ेगी, यह शी को समझ में आ गया.

मोदी से बैठक के बाद जिनपिंग ने सार्वजनिक रूप से आतंकवाद पर एक शब्द नहीं कहा, लेकिन भारत पर बड़ा संदेश दिया. उन्होंने कहा, "चीन और भारत सबसे सभ्य देशों में से हैं. हम दुनिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले देश हैं. हमें मित्रता और पड़ोसी के रूप में एक-दूसरे के साथ खड़े होना चाहिए. ड्रैगन और हाथी को एकजुट होना चाहिए."


1 सितंबर को SCO बैठक में मोदी ने पहलगाम हत्याकांड पर पाकिस्तान को फिर निशाना बनाया. उन्होंने कहा, "पहलगाम में आतंकी हमला सिर्फ भारत की आत्मा पर चोट नहीं है, बल्कि उन सभी देशों के लिए खुली चुनौती है जो मानवता में विश्वास रखते हैं. हमें सुनिश्चित करना होगा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में कोई दोहरा रवैया बर्दाश्त नहीं किया जाएगा." उनके भाषण के बाद SCO ने संयुक्त बयान जारी किया.


तियानजिन सम्मेलन में पाक प्रधानमंत्री शाहबाज के सामने मोदी ने कहा, "कुछ लोग खुलेआम आतंकवाद को समर्थन दे रहे हैं." बाद में SCO की ओर से जारी बयान में कहा गया, "सदस्य देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की. मृतकों और घायलों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की. इस घटना के अपराधी, आयोजक और समर्थकों को न्याय के दायरे में लाना होगा."


इसके अलावा, बयान में आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने का जिक्र है. इसमें कहा गया, "सदस्य देश आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई में दृढ़ हैं. साथ ही, आतंकी संगठन, अलगाववादी और उग्रवादी समूहों को 'किराए के सैनिक' के रूप में इस्तेमाल करने के प्रयासों को रोकने पर जोर दे रहे हैं."


इस साल 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम के बसारन घाटी में पाक समर्थित आतंकियों के हमले में पर्यटकों समेत 26 लोगों की मौत हुई. आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलीबारी कर उन्हें बेरहमी से मारा. शुरुआत में हमले की जिम्मेदारी इस्लामाबाद की कुख्यात लश्कर-ए-तैयबा की छाया संगठन 'द रेसिस्टेंस फ्रंट' (TRF) ने ली, लेकिन बाद में इंकार कर दिया.


पहलगाम हमले के बाद भारत ने 65 साल पुराने 'सिंधु जल समझौते' को स्थगित कर दिया. साथ ही, 7 मई को पाकिस्तान और पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) के आतंकी ठिकानों पर हमला किया, जिसका नाम 'ऑपरेशन सिंदूर' रखा गया.


भारतीय सेना के आतंकी ठिकानों को निशाना बनाते ही इस्लामाबाद हरकत में आ गया. आतंकवादियों के पक्ष में खड़े होकर पाक जनरलों ने ड्रोन और मिसाइल हमले किए. लड़ाकू जेट से भारतीय हवाई क्षेत्र में घुसने की कोशिश की, लेकिन एयर डिफेंस सिस्टम से सभी हमलों को विफल कर दिया गया. साथ ही, इजरायली 'सुसाइड' ड्रोन से पाक की चीनी एयर डिफेंस सिस्टम को उड़ा दिया.


इसके बाद पाक सेना को सबक सिखाने के लिए उनकी वायुसेना के कई कैंपों को निशाना बनाया. सूत्रों के मुताबिक, इस हमले में रूस के साथ संयुक्त रूप से विकसित 'ब्रह्मोस' सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का इस्तेमाल किया गया. नतीजतन, चकलाला के नूर खान, रफिकी, मुरीदके, पसरूर और सियालकोट के पाक एयरबेस उड़ गए. इसके अलावा, सुक्कुर और चुनीयां में पाक थलसेना के ठिकानों पर भी मिसाइलें गिरीं. 8 और 9 मई की रात को भारतीय वायुसेना ने लड़ाकू विमानों से यह जवाबी कार्रवाई की.


भारतीय वायुसेना के मिसाइल हमलों में पाक वायुसेना का 20% इंफ्रास्ट्रक्चर नष्ट हो गया. नतीजतन, पाक सेना ने जल्दी से लड़ाई रोकने के लिए भारतीय DGMO को फोन किया. 10 मई शाम को दोनों पक्षों ने संघर्ष विराम की घोषणा की. 'युद्ध' थमने पर पाक सेना के ISPR ने नुकसान का हिसाब देकर बयान जारी किया.


संघर्ष थमने पर इस्लामाबाद ने कहा कि भारत के हमले में सिर्फ 10-12 सैनिक मारे गए. लेकिन आरोप लगाया कि नई दिल्ली ने आम नागरिकों को निशाना बनाया. इसका खंडन करते हुए DGMO लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने बयान दिया, "नौ आतंकी ठिकानों पर हमले में 100 से ज्यादा आतंकियों की मौत हुई, जिनमें यूसुफ अजहर, अब्दुल मलिक रऊफ और मुदस्सर अहमद शामिल हैं. मारे गए आतंकियों में IC-814 अपहरण और पुलवामा हमले में शामिल लोग हैं."


पिछले अगस्त में अमेरिका दौरे पर पाक सेनाध्यक्ष फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने फिर भारत को परमाणु युद्ध की धमकी दी. कहा, "सिंधु नदी पर नई दिल्ली बांध बनाए तो 10 मिसाइलों से उसे ध्वस्त कर देंगे. हमारे पास मिसाइलों की कोई कमी नहीं है." उनके इस बयान पर मोदी सरकार ने पलटवार करते हुए 'परिणाम भुगतने' की चेतावनी दी.


इस स्थिति में SCO बैठक में पाक प्रधानमंत्री शाहबाज ने 'सिंधु जल बंटवारा समझौते' का जिक्र किया. कहा, "शर्तों के मुताबिक पानी का अबाध और निष्पक्ष बंटवारा माना जाए तो इस संगठन का काम आसान होगा." हालांकि, केंद्र ने स्पष्ट कर दिया कि सीमा पार आतंकवाद बंद न होने तक समझौते से स्थगितादेश हटाना संभव नहीं है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP