RSS पर बैन की मांग विभाजनकारी सोच का नतीजा- विजय शर्मा
रायपुर । संवाददाता: कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खरगे की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और मंदिरों में गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने की मांग ने राजनीतिक विवाद को हवा दे दी है. छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस की मंशा पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि जो संगठन भारत के धार्मिक आधार पर विभाजन के लिए जिम्मेदार थे, वे ऐसी बातें कैसे कर सकते हैं.
प्रियंक खरगे ने रविवार को मुख्यमंत्री सिद्धरमैया से अपील की थी कि आरएसएस की गतिविधियों को सरकारी संस्थानों से दूर रखा जाए. उन्होंने संगठन पर युवाओं के दिमाग धोने और संविधान-विरोधी दर्शन को बढ़ावा देने का आरोप लगाया.
खरगे ने तंज कसते हुए कहा कि आरएसएस के लोग 'हिंदू खतरे में है, ज्यादा बच्चे पैदा करो' का नारा तो देते हैं, लेकिन खुद अविवाहित रहते हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा नेताओं के बच्चे क्यों नहीं इन गतिविधियों में हिस्सा लेते? साथ ही, उन्होंने आरएसएस को मनुस्मृति को संविधान बनाने का समर्थक बताया, जो गरीबों को ही लक्षित करता है.
इस बीच, केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने खरगे के बयान को खारिज करते हुए आरएसएस की तारीफ की. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पूर्व नेता जैसे नेहरू, इंदिरा और सोनिया गांधी ने भी संगठन को दबाने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहे.
जोशी ने जोर देकर कहा कि आरएसएस दुनिया का एकमात्र ऐसा संगठन है जो गुटबाजी से मुक्त है. उन्होंने मुस्लिम लीग को देश विभाजन का दोषी ठहराते हुए कांग्रेस पर तुष्टिकरण का आरोप लगाया. जोशी का मानना है कि आरएसएस की विचारधारा वाले विधायक, सांसद और नेता ही बहुमत में हैं, इसलिए कुछ जगहों पर प्रतिबंध से कोई फर्क नहीं पड़ेगा.
छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने किसान संघ और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) जैसे संगठनों का जिक्र किया, जो दुनिया के सबसे बड़े संगठनों की श्रृंखला का हिस्सा हैं. उन्होंने पूछा कि ऐसी मांगों का आधार क्या है? शर्मा ने कांग्रेस को राष्ट्रवादी विचारों का विरोधी बताया, जो पीएफआई और एसएफआई जैसे संगठनों का समर्थन करता है.
यह विवाद कर्नाटक से शुरू होकर राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है, जहां भाजपा और कांग्रेस के बीच वैचारिक टकराव तेज हो गया है. खरगे ने स्पष्ट किया कि निजी जगहों पर आरएसएस की गतिविधियों में कोई आपत्ति नहीं, लेकिन सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग स्वीकार्य नहीं.