एक राष्ट्र, एक चुनाव पर CJIs
नई दिल्ली । डेस्क: एक राष्ट्र एक चुनाव पर दो पूर्व मुख्य न्यायाधीशों ने जताई सहमति है लेकिन अहम शर्तें रखी हैं. भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों डी. वाई. चंद्रचूड़ और जे. एस. खेहर ने 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति के समक्ष अपनी राय प्रस्तुत की.
दोनों ने इस प्रस्ताव को संवैधानिक रूप से उचित माना, लेकिन इसके लिए महत्वपूर्ण सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया.
सूत्रों के अनुसार, जस्टिस चंद्रचूड़ ने विधेयक में भारतीय निर्वाचन आयोग को दी गई व्यापक शक्तियों पर चिंता जताई है, विशेष रूप से चुनाव स्थगित करने या संवैधानिक प्रावधानों में बदलाव करने की शक्ति पर. उन्होंने सुझाव दिया कि भारतीय निर्वाचन आयोग को केवल राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था जैसे असाधारण मामलों में ही चुनाव टालने की अनुमति होनी चाहिये.
साथ ही, ऐसे निर्णयों को संसद के दोनों सदनों द्वारा अनुमोदित किया जाना चाहिये और यह केवल एक निश्चित अवधि के लिए मान्य होना चाहिये.
जस्टिस चंद्रचूड़ ने विधेयक में दो प्रमुख कमियों को रेखांकित किया: पहला, राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अस्पष्टता: विधेयक में यह स्पष्ट नहीं है कि राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान, जब संसद और राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, एकसाथ चुनाव चक्र कैसे प्रभावित होगा.
दूसरा, राज्य विधानसभाओं का समयपूर्व विघटन: विधेयक में समय से पहले विघटित होने वाली राज्य विधानसभाओं के प्रबंधन के बारे में स्पष्टता का अभाव है.
उन्होंने संवैधानिक संतुलन बनाये रखने के लिए भारतीय निर्वाचन आयोग की शक्तियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित और सीमित करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसमें अनुच्छेद 356(5) को एक उपयोगी संदर्भ बिंदु बताया.
जे. एस. खेहर की राय
पूर्व मुख्य न्यायाधीश जे. एस. खेहर ने भी इस विधेयक को संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन न करने वाला बताया, लेकिन भारतीय निर्वाचन आयोग की शक्तियों से संबंधित प्रावधानों पर और विचार-विमर्श की आवश्यकता जताई. उन्होंने कहा कि संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिये विधेयक में सटीक विधायी भाषा और जांच तंत्र आवश्यक हैं.
बीजेपी सांसद पी. पी. चौधरी की अध्यक्षता वाली जेपीसी, संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 की समीक्षा कर रही है. ये विधेयक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव चक्रों को समन्वित करके एकसाथ चुनाव कराने का प्रस्ताव करते हैं.
दोनों पूर्व मुख्य न्यायाधीशों ने 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' की अवधारणा का समर्थन किया, लेकिन इसकी सफलता के लिये स्पष्ट और संतुलित प्रावधानों की आवश्यकता पर बल दिया. उनकी सिफारिशें विधेयक को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं.