SCO समिट में मोदी की बड़ी कूटनीतिक चुनौतियां
नई दिल्ली । डेस्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 अगस्त 2025 को चीन के तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट में भाग लेने पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत हुआ. यह उनकी सात साल बाद पहली चीन यात्रा है और गलवान झड़प (2020) के बाद राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ पहली द्विपक्षीय मुलाकात होगी.
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी उनकी बातचीत होगी, जिसमें अमेरिका के हालिया 50% टैरिफ और रूसी तेल आयात पर प्रतिबंधों का मुद्दा प्रमुख रहेगा. यह मुलाकात अमेरिका-भारत व्यापार तनाव के बीच खास अहमियत रखती है, क्योंकि अमेरिका ने 27 साल बाद भारत पर प्रतिबंध लगाए हैं, जिसे लेकर भारत ने कड़ा रुख अपनाया है.
मोदी का पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से पहली बार आमना-सामना होगा, जो मई 2025 के पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद तनावपूर्ण है.
SCO में भारत और पाकिस्तान के बीच “सीमा पार आतंकवाद” पर तीखी बहस की उम्मीद है, क्योंकि भारत इस मुद्दे को मजबूती से उठाना चाहता है. 2023 के दिल्ली घोषणापत्र में “आतंकवादियों की सीमा पार आवाजाही” का जिक्र था, जो पिछले साल अस्ताना में हटा दिया गया था.
मोदी की तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन और नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली से मुलाकात भी चर्चा में रहेगी.
तुर्की के पाकिस्तान समर्थन और भारत द्वारा तुर्की के व्यवसायों पर प्रतिबंधों ने तनाव बढ़ाया है, जबकि नेपाल के साथ लिपुलेख में भारत-चीन सीमा व्यापार को लेकर विवाद है.
SCO के “पश्चिम विरोधी” माने जाने वाले नेताओं-चीन, रूस, ईरान, बेलारूस और मध्य एशियाई देशों-के साथ मोदी की तस्वीरें वैश्विक सुर्खियां बनेंगी, खासकर भारत-अमेरिका व्यापार विवाद के बीच.
SCO समिट में गाजा युद्ध पर कड़ा बयान जारी हो सकता है, जिसमें 62,000 से अधिक फिलिस्तीनियों की मौत और भुखमरी की स्थिति का जिक्र हो सकता है.
इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे पर्यवेक्षक देशों की मौजूदगी के कारण यह बयान और सख्त हो सकता है, जिस पर भारत को हस्ताक्षर करना पड़ सकता है.
शी के साथ बैठक में LAC पर डिसएंगेजमेंट, दोनों देशों के बीच 50,000 सैनिकों की तैनाती, प्रत्यक्ष उड़ानों की बहाली, कैलाश मानसरोवर यात्रा, और सीमा व्यापार जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी.
भारत चीनी निर्यात प्रतिबंधों को हटाने की मांग करेगा, जबकि चीन 2020 के “प्रेस नोट 3” के तहत FDI प्रतिबंधों को हटाने की बात उठाएगा.
पुतिन के साथ बातचीत में यूक्रेन शांति प्रक्रिया और दिसंबर में उनकी भारत यात्रा पर फोकस होगा.