वाम दलों ने भारत-चीन संबंधों में प्रगति का स्वागत किया
नई दिल्ली । डेस्क: वाम दलों ने भारत और चीन के बीच संबंधों में हुई प्रगति का स्वागत किया है. शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई वार्ता के बाद यह कदम उठाया गया.
सीपीआई (एम) के महासचिव एम.ए. बेबी ने रविवार (31 अगस्त 2025) को एक्स पर एक पोस्ट में भारत-चीन संबंधों में प्रगति और सीमा प्रबंधन, कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली और सीधी उड़ानों पर हुए समझौतों का स्वागत किया. उन्होंने कहा, “हमारे दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ पर, विश्व की दो सबसे अधिक आबादी वाले देशों और प्राचीन सभ्यताओं के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों और सहयोग को मजबूत करना एक बहुत ही सकारात्मक विकास है.”
बेबी ने कहा कि दोनों पक्षों द्वारा आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता पर आधारित भविष्य की पुष्टि करना महत्वपूर्ण है. “भारत और चीन, ग्लोबल साउथ के प्रमुख सदस्यों के रूप में, बहुपक्षवाद को बनाए रखने, साम्राज्यवादी दबावों का विरोध करने और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को आगे बढ़ाने की ऐतिहासिक जिम्मेदारी रखते हैं. हमारे दोनों देशों के बीच एकजुटता को मजबूत करना न केवल हमारे लोगों के कल्याण के लिए, बल्कि पूरी मानवता के लिए शांति और प्रगति के लक्ष्य को भी बढ़ावा देगा.”
सोमवार को जारी एक बयान में, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) ने इस बैठक के “सकारात्मक परिणाम” की सराहना की. सीपीआई ने कहा, “भारत और चीन, विश्व की दो प्राचीन सभ्यताओं के नेताओं के बीच यह संवाद इस बात की पुष्टि करता है कि दोनों देश प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साझेदार बनने के लिए नियत हैं.”
पार्टी ने कहा कि यह संवाद सभी स्तरों-राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और जन-जन के बीच बेहतर समझ की दिशा में एक प्रतिबद्धता का संकेत देता है. “ऐसा सहयोग न केवल हमारे दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि ग्लोबल साउथ की एकता को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बहुध्रुवीयता को बढ़ावा देने के लिए भी आवश्यक है,” बयान में कहा गया.
सीपीआई ने यह भी कहा कि जब साम्राज्यवादी ताकतें बांटने और प्रभुत्व जमाने की कोशिश कर रही हैं, तब भारत और चीन की एकता और सहयोग एक वैकल्पिक विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देगा, जो समानता, न्याय और राष्ट्रों के बीच आपसी सम्मान पर आधारित होगी.
गौरतलब है कि एससीओ शिखर सम्मेलन के मौके पर हुई इस बैठक में, पीएम मोदी और शी जिनपिंग ने भारत-चीन सीमा मुद्दे का “निष्पक्ष, तर्कसंगत और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य” समाधान खोजने पर सहमति जताई और व्यापार और निवेश संबंधों को बढ़ाने का संकल्प लिया, जो वैश्विक व्यापार को स्थिर करने में दोनों अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका को मान्यता देता है.