अरुंधति रॉय की किताब पर धूम्रपान की तस्वीर: केरल हाईकोर्ट ने PIL खारिज की
कोच्चि । डेस्क: केरल उच्च न्यायालय (Kerala High Court) ने सोमवार 13 अक्टूबर, 2025 को बुकर पुरस्कार विजेता लेखिका अरुंधति रॉय की हालिया किताब 'मदर मैरी कम्स टू मी' की बिक्री पर रोक लगाने की मांग वाली एक जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया है. यह याचिका किताब के कवर पर अरुंधति रॉय की बीड़ी पीते हुए तस्वीर को लेकर दायर की गई थी.
याचिकाकर्ता, जो कि एक वकील हैं, ने अपनी याचिका में तर्क दिया था कि कवर फोटो में धूम्रपान को दर्शाया गया है, लेकिन इस पर वैधानिक स्वास्थ्य चेतावनी का कोई लेबल नहीं है. उन्होंने इसे 'सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम, 2013' की धारा 5 का उल्लंघन बताया था.
मुख्य न्यायाधीश नितिन जामदार और न्यायमूर्ति बसंत बालाजी की खंडपीठ ने PIL को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को फटकार लगाई. कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता ने कानून का अध्ययन किए बिना और किताब के पिछले कवर पर दिए गए लिखित अस्वीकरण (disclaimer) को सत्यापित किए बिना ही याचिका दायर कर दी. बाद में यह सामने आया था कि किताब के पीछे धूम्रपान के बुरे प्रभावों के बारे में एक स्पष्ट अस्वीकरण मौजूद है.
अदालत ने कहा कि यह निर्धारित करना कि यह तस्वीर अधिनियम का उल्लंघन है या नहीं, इसके लिए गठित संचालन समिति (steering committee) का काम है. पीठ ने इस बात पर ज़ोर दिया कि याचिकाकर्ता ने समिति के समक्ष इस मुद्दे को नहीं उठाया.
'स्व-प्रचार' का ज़िक्र
न्यायालय ने याचिका खारिज करते हुए यह भी सचेत किया कि अदालतों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि PIL का इस्तेमाल स्व-प्रचार (self-publicity) या व्यक्तिगत निंदा के लिए नहीं किया जाए.
याचिकाकर्ता के वकील ने सुनवाई के दौरान तर्क दिया था कि पीछे दिया गया अस्वीकरण पर्याप्त नहीं है और कवर पर फोटो होने के कारण यह प्रभावशाली युवाओं, खासकर लड़कियों और महिलाओं को गुमराह करने वाला संदेश दे सकती है.
इस पर, केंद्र के वकील ने बताया कि ऐसी शिकायतों के लिए राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के तहत एक ऑनलाइन पोर्टल और संचालन समिति मौजूद है, जिनका उपयोग करने के बजाय सीधे हाईकोर्ट आना उचित नहीं था.