भारत को रेयर अर्थ तत्वों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनना होगा: राष्ट्रपति मुर्मू
नई दिल्ली । डेस्क: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को कहा कि वर्तमान भू-राजनीतिक स्थिति को देखते हुए भारत के लिए रेयर अर्थ तत्वों (आरईई) के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करना अत्यंत महत्वपूर्ण है. उन्होंने नई दिल्ली में राष्ट्रीय भूविज्ञान पुरस्कार 2024 के दौरान अपने संबोधन में यह बात कही.
राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि आत्मनिर्भरता न केवल भारत को विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगी, बल्कि देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
रेयर अर्थ तत्व, जो 17 रासायनिक रूप से समान धातु तत्वों का समूह हैं, स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), और पवन टरबाइन जैसी आधुनिक तकनीकों के लिए आवश्यक हैं. राष्ट्रपति ने कहा कि ये तत्व दुर्लभ नहीं हैं, लेकिन इन्हें पहचानने की प्रक्रिया जटिल है. स्वदेशी तकनीक विकसित करने से इस जटिल प्रक्रिया को पूरा करने में मदद मिलेगी.
मुर्मू ने कहा कि यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), सेमीकंडक्टर, और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी का युग है. खान मंत्रालय स्थिरता और नवाचार के लिए प्रतिबद्ध है, और खनन क्षेत्र में एआई, मशीन लर्निंग, और ड्रोन आधारित सर्वेक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसके अलावा, खनन अपशिष्टों से मूल्यवान तत्वों की रिकवरी पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है.
राष्ट्रपति ने इस वर्ष देश के कई हिस्सों में बादल फटने और भूस्खलन से हुए नुकसान का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी प्राकृतिक आपदाओं की समय पर जानकारी प्राप्त करना महत्वपूर्ण है.
उन्होंने भूवैज्ञानिक समुदाय से बाढ़, भूस्खलन, भूकंप, और सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाओं पर शोध को और अधिक महत्व देने का आग्रह किया. साथ ही, उन्होंने ऐसी तकनीकों के विकास की अपील की, जिनसे आम लोगों को इन आपदाओं के बारे में समय पर चेतावनी दी जा सके.
राष्ट्रीय भूविज्ञान पुरस्कार, जिसे 1966 में खान मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया था (2009 तक राष्ट्रीय खनिज पुरस्कार के नाम से जाना जाता था), भूविज्ञान के क्षेत्र में देश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक है.