हिजबुल्लाह ने लेबनान-इजरायल समझौते को खारिज किया
नई दिल्ली । डेस्क: हिजबुल्लाह के प्रमुख नईम कासिम ने लेबनान और इजरायल के बीच अमेरिका की मध्यस्थता में हुए सुरक्षा समझौते को पूरी तरह खारिज कर दिया है. शुक्रवार को हस्ताक्षर किए गए इस समझौते को शनिवार को 'शून्य और अमान्य' घोषित करते हुए कासिम ने इसे इजरायल के सामने आत्मसमर्पण करार दिया.
उन्होंने लेबनान सरकार पर एकतरफा रियायतें देने और देश की संप्रभुता से समझौता करने का आरोप लगाया.
नईम कासिम ने उस प्रावधान की कड़े शब्दों में आलोचना की, जिसमें इजरायल की वापसी को हिजबुल्लाह के निरस्त्रीकरण से जोड़ा गया है. उन्होंने कहा कि यह शर्त लेबनान में इजरायली सैन्य उपस्थिति को वैध बनाती है और सभी 'लक्ष्मण रेखाओं' (रेड लाइन्स) को पार करती है.
कासिम ने साफ किया कि उनका संगठन सशस्त्र प्रतिरोध जारी रखेगा और किसी भी परिस्थिति में युद्ध का मैदान नहीं छोड़ेगा. हिजबुल्लाह का मानना है कि इस महीने की शुरुआत में हुए ईरान-अमेरिका समझौता ज्ञापन को शांति का आधार बनाया जाना चाहिए, न कि शुक्रवार के वॉशिंगटन समझौते को.
इस राजनीतिक गतिरोध के बीच जमीन पर तनाव कम होता नहीं दिख रहा है. समझौते के अगले ही दिन इजरायल ने दक्षिणी लेबनान के नबातीह अल-फौका इलाके में एक ड्रोन हमला किया.
लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, यह हमला उस सुरक्षा क्षेत्र से बाहर हुआ है जिसे इजरायल ने अपने नियंत्रण वाले नक्शे में दिखाया था. इजरायली सेना ने रॉयटर्स से पुष्टि की कि उन्होंने अपने बलों के लिए खतरा बने एक संदिग्ध व्यक्ति को निशाना बनाकर यह ड्रोन हमला किया.
गौरतलब है कि ईरान-इजरायल युद्ध के समानांतर चल रहे इस संघर्ष के कारण अब तक 10 लाख से अधिक लेबनानी नागरिक बेघर हो चुके हैं. बार-बार होने वाले युद्धविराम और समझौतों के बावजूद क्षेत्र में हिंसा का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है.
हिजबुल्लाह (Hezbollah) कौन हैं ?
हिजबुल्लाह (Hezbollah) लेबनान का एक शिया बहुल राजनीतिक और सैन्य संगठन है, जिसका अर्थ 'अल्लाह का दल' या 'ईश्वर का संगठन' होता है. इसकी स्थापना मुख्य रूप से 1982 में लेबनान पर इजरायली आक्रमण और कब्जे के विरोध में हुई थी.
ईरान ने इस संगठन को खड़ा करने, प्रशिक्षित करने और वित्तीय रूप से मजबूत बनाने में सबसे अहम भूमिका निभाई है, इसलिए हिजबुल्लाह को मध्य पूर्व में ईरान के 'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' का सबसे शक्तिशाली हिस्सा माना जाता है. लेबनान की राजनीति में भी इसकी गहरी पैठ है. यह न केवल एक सशस्त्र बल है, बल्कि लेबनान की संसद और सरकार में शामिल एक प्रमुख राजनीतिक दल भी है, जो देश के शिया समुदाय के बीच अस्पताल, स्कूल और सामाजिक सेवाएं चलाकर मजबूत सामाजिक आधार रखता है.
सैन्य ताकत के मामले में हिजबुल्लाह को दुनिया के सबसे शक्तिशाली गैर-सरकारी सैन्य बलों में से एक माना जाता है, जिसके पास हजारों प्रशिक्षित लड़ाके, आधुनिक ड्रोन, एंटी-टैंक मिसाइलें और एक विशाल रॉकेट शस्त्रागार है.
अपनी स्थापना के बाद से ही हिजबुल्लाह का इजरायल के साथ लंबा और हिंसक संघर्ष रहा है, जिसमें साल 2006 का लेबनान युद्ध और हालिया वर्षों में चल रही सैन्य झड़पें प्रमुख हैं.
इजरायल के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और कई अरब देश हिजबुल्लाह को एक आतंकवादी संगठन घोषित कर चुके हैं, जबकि लेबनान का एक बड़ा धड़ा और इसके समर्थक इसे इजरायली आक्रामकता के खिलाफ देश का रक्षा कवच मानते हैं.
सीरियाई गृहयुद्ध में भी हिजबुल्लाह ने राष्ट्रपति बशर अल-असद की सरकार को बचाने के लिए सीधे तौर पर युद्ध में हिस्सा लिया था, जिससे इसकी क्षेत्रीय पहुंच और युद्ध का अनुभव काफी बढ़ गया.