चिप उद्योग में आत्मनिर्भरता पर जोर, मिशन का बजट दोगुना किया
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संभावित टैरिफ नीतियों से वैश्विक व्यापार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच भारत सरकार सेमीकंडक्टर यानी चिप उद्योग में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रही है. केंद्रीय बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ के दूसरे चरण की घोषणा करते हुए इसके लिए बजट आवंटन दोगुना कर 40,000 करोड़ रुपये कर दिया है.
केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सेमीकंडक्टर मिशन के तहत अब तक 46 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें सैमसंग, टाटा और फॉक्सकॉन जैसी बड़ी वैश्विक कंपनियां शामिल हैं.
उन्होंने दावा किया कि भारत के पास इस क्षेत्र के लिए दुनिया के सबसे कुशल मानव संसाधन हैं, इसी वजह से निवेशकों की रुचि लगातार बढ़ रही है. सरकार ने इस क्षेत्र के लिए 20 वर्षों का दीर्घकालिक लक्ष्य तय किया है, जिसका दूसरा चरण बजट में सामने आया है.
बजट में डेटा सेंटर और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर को भी विशेष प्रोत्साहन दिया गया है. साथ ही ओडिशा, केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में दुर्लभ खनिजों के ब्लॉक विकसित करने की योजना की घोषणा की गई है.
उद्योग जगत का कहना है कि चिप निर्माण के लिए दुर्लभ खनिज बेहद आवश्यक हैं, और इस कदम से भारत चीन समेत अन्य देशों पर निर्भरता कम कर सकेगा.
हालांकि सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना के बजट में कटौती को लेकर सवाल भी उठे हैं. इसके बावजूद इंडियन इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (IESA) के अध्यक्ष अशोक चंदक का मानना है कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में प्रगति से इलेक्ट्रिक वाहन, मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद निर्माण से जुड़ी कंपनियां भी भारत की ओर आकर्षित होंगी.
वहीं, सीआईआई की आईटी समिति के चेयरमैन प्रसेंजित सेनगुप्ता के अनुसार सेमीकंडक्टर के लिए 40,000 करोड़ और ऊर्जा परियोजनाओं के लिए 10,000 करोड़ रुपये का आवंटन भारत को तकनीकी और औद्योगिक रूप से काफी आगे ले जा सकता है.