छत्तीसगढ़ से आए जंगली हाथी त्रिदेव को पुनर्वास के बाद छोड़ा गया
भोपाल । डेस्क: पिछले साल मध्य प्रदेश के अनुपपुर जिले में छत्तीसगढ़ से आए जंगली हाथियों के झुंड ने गांवों में घुसकर घरों और फसलों को नुकसान पहुंचाया था, साथ ही एक व्यक्ति की जान भी ले ली थी. इस घटना के बाद पकड़े गए दो हाथियों में से एक, त्रिदेव, को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (बीटीआर) में छोड़ा गया है. यह जानकारी एक वन अधिकारी ने साझा की है.
त्रिदेव को किसली रेंज के कोपेडबारी एलिफेंट कैंप वेटरनरी केयर फैसिलिटी में विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की देखरेख में उपचार और पुनर्वास के लिए रखा गया था. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जबलपुर खंडपीठ के निर्देश पर गठित एलिफेंट एडवाइजरी कमेटी ने 18 अगस्त को बैठक में त्रिदेव को स्वस्थ और प्राकृतिक व्यवहार प्रदर्शित करते पाया.
कोर्ट ने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में एक अन्य जंगली हाथी की कैद में मृत्यु पर चिंता व्यक्त की थी और त्रिदेव की रिहाई के लिए विस्तृत योजना की मांग की थी.
वन्यजीव के अतिरिक्त प्रधान मुख्य संरक्षक (एपीसीसीएफ) एल कृष्णमूर्ति ने कहा, "हाथी को मंगलवार को कान्हा टाइगर रिजर्व से ट्रक द्वारा बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व ले जाया गया. उसकी गतिविधियों पर नजर रखने और यह जांचने के लिए कि वह झुंड में शामिल होता है या अकेला रहता है, उसके गले में सैटेलाइट रेडियो कॉलर लगाया गया है."
पिछले 10 वर्षों में मध्य प्रदेश में पकड़े गए 10 जंगली हाथियों में से त्रिदेव तीसरा हाथी है, जिसे ट्रैकिंग कॉलर के साथ जंगल में रिहा किया गया है.
फरवरी 2024 में गांव पर हमले के बाद, हाथियों और मनुष्यों की सुरक्षा के लिए वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 11(1)(ए) के तहत पकड़ने के आदेश दिए गए थे. इसके बाद गठित कमेटी की सिफारिशों पर दोनों हाथियों को बांधवगढ़ और कान्हा टाइगर रिजर्व में कैद में रखा गया था.
20 अक्टूबर 2024 को एक हाथी को स्वास्थ्य और व्यवहार की निगरानी के बाद, साथ ही जंगल में पुनर्वास की संभावना का वैज्ञानिक आकलन करने के बाद, खुले जंगल में छोड़ा गया था. त्रिदेव को स्वास्थ्य समस्याओं के कारण तुरंत रिहा नहीं किया जा सका और उसे कान्हा टाइगर रिजर्व में रखा गया था. (फोटो- प्रतीकात्मक)