बॉम्बे HC: सलाहकार डॉक्टरों को भुगतान TDS 194J के तहत कटौती योग्य
मुंबई । डेस्क: बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि सलाहकार डॉक्टरों को किया गया भुगतान, यदि निश्चित वेतन के अभाव में है, तो इसे वेतन नहीं माना जा सकता. इसलिए, इस तरह के भुगतान पर आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 194J के तहत टीडीएस (टैक्स डिडक्शन एट सोर्स) कटौती लागू होगी.
यह मामला डॉ. बालाभाई नानावती अस्पताल, जो एक ट्रस्ट द्वारा संचालित है, से संबंधित है. आयकर विभाग ने अस्पताल के परिसर में 4 अक्टूबर 2010 को धारा 133A के तहत एक सर्वेक्षण किया था, जिसमें टीडीएस कटौती, त्रैमासिक टीडीएस रिटर्न दाखिल करने और टीडीएस कटौती में देरी के संबंध में अनियमितताएं पाई गई थीं.
आयकर विभाग का तर्क था कि अस्पताल ने अपने पैनल पर सलाहकार डॉक्टरों को नियुक्त किया था और इन डॉक्टरों को दी गई मानद राशि पर धारा 194J के तहत टीडीएस काटा गया, जिसे पेशेवर सेवाओं के लिए शुल्क माना गया. हालांकि, मूल्यांकन अधिकारी ने नियुक्ति पत्र और इन सलाहकार/मानद डॉक्टरों के साथ हुए समझौते की जांच के बाद पाया कि अस्पताल इन डॉक्टरों पर विभिन्न प्रतिबंधात्मक शर्तों, उपस्थिति की शर्तों, जवाबदेही और अवकाश आदि के माध्यम से काफी हद तक नियंत्रण रखता है. इसके आधार पर, मूल्यांकन अधिकारी ने निष्कर्ष निकाला कि ये सलाहकार डॉक्टर अस्पताल के कर्मचारी हैं और उन्हें किया गया भुगतान "वेतन" की प्रकृति का है. इसलिए, टीडीएस धारा 192 के तहत काटा जाना चाहिए था, न कि धारा 194J के तहत. इसके परिणामस्वरूप, अस्पताल को धारा 201(1) और 201(1A) के तहत डिफॉल्ट माना गया और कर व ब्याज की मांग की गई.
अस्पताल ने मूल्यांकन अधिकारी के इस आदेश के खिलाफ आयकर अपील आयुक्त (CIT-A) के समक्ष अपील दायर की. CIT(A) ने आकलन वर्ष 2007-08 से 2010-11 और 2011-12 व 2012-13 के लिए अस्पताल के पक्ष में फैसला सुनाया. CIT(A) ने माना कि सलाहकार/मानद डॉक्टरों को किया गया भुगतान वेतन नहीं है. हालांकि, कुछ वार्षिक रखरखाव अनुबंधों (AMCs) के भुगतान को "तकनीकी सेवाओं" की श्रेणी में माना गया.
बॉम्बे हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस बी.पी. कोलाबावाला और जस्टिस फिरदोश पी. पूनीवाला शामिल थे, ने कहा कि अस्पताल और इन डॉक्टरों के बीच "नियोक्ता-कर्मचारी" का संबंध नहीं है. कोर्ट ने ध्यान दिया कि ये डॉक्टर निश्चित मासिक वेतन नहीं पाते, बल्कि उनकी आय उनके द्वारा किए गए कार्य पर निर्भर करती है. अस्पताल मरीजों से प्राप्त इन डॉक्टरों की फीस का एक हिस्सा अपने पास रखता है. इसके अलावा, ये डॉक्टर अन्य अस्पतालों में स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस करने के लिए स्वतंत्र हैं और उन्हें कोई पीएफ, ईएसआईसी सुविधाएं या अन्य लाभ नहीं दिए जाते. ये डॉक्टर मरीजों की जरूरतों के आधार पर अपनी ड्यूटी करते हैं और अस्पताल द्वारा कोई निश्चित समय-सारिणी लागू नहीं की जाती.
कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि ये डॉक्टर अपनी आयकर रिटर्न में अपनी आय को "व्यवसाय या पेशे से आय" के रूप में दाखिल करते हैं, न कि वेतन के रूप में, जैसा कि मूल्यांकन अधिकारी ने दावा किया था. इस आधार पर, कोर्ट ने आयकर अपीलीय अधिकरण (ITAT) के उस निर्णय को सही ठहराया, जिसमें कहा गया था कि सलाहकार डॉक्टरों को किया गया भुगतान धारा 194J के तहत पेशेवर शुल्क के रूप में माना जाएगा, न कि धारा 192 के तहत वेतन के रूप में.