इलाहाबाद HC ने संभल में मस्जिद तोड़ने पर रोक लगाने की याचिका खारिज की
प्रयागराज । डेस्क: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शनिवार को संभल जिले में तालाब और सरकारी जमीन पर बनी मस्जिद के विध्वंस पर रोक लगाने की मस्जिद समिति की याचिका को खारिज कर दिया. एकल पीठ के समक्ष विशेष सुनवाई में जस्टिस दिनेश पाठक ने याचिकाकर्ताओं को कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया.
कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को विध्वंस के खिलाफ किसी भी राहत के लिए ट्रायल कोर्ट में अपील दायर करने का निर्देश दिया. इसके बाद हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी.
यह मामला लगातार दूसरे दिन अवकाश के दौरान विशेष सुनवाई के रूप में चला.
शुक्रवार की सुनवाई में कोर्ट ने मस्जिद की जमीन से संबंधित दस्तावेज मांगे थे, जिन्हें याचिकाकर्ताओं ने शनिवार को जमा कर दिया.
याचिकाकर्ताओं के वकील अरविंद कुमार त्रिपाठी के अनुसार, कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ही विध्वंस का आदेश प्राप्त हुआ.
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने औपचारिक आदेश जारी किए बिना ही तोड़फोड़ अभियान शुरू कर दिया था.
हाईकोर्ट में दायर याचिका में मस्जिद, शादी हॉल और अस्पताल के विध्वंस पर रोक लगाने की मांग की गई थी, दावा किया गया कि ये संरचनाएं खतरे में हैं.
याचिका मस्जिद शरीफ गोसुलबारा रावन बूजुर्ग और मस्जिद के मुतवल्ली मिन्जर की ओर से दायर की गई थी.
मस्जिद पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि शादी हॉल का विध्वंस पहले ही हो चुका है और प्रशासन ने 2 अक्टूबर (गांधी जयंती और दशहरा) को विध्वंस चुना, जब बड़ी भीड़ मौजूद थी, जिससे बड़ा हादसा या सांप्रदायिक दंगा या तनाव हो सकता था.
प्रशासन का दावा है कि शादी हॉल तालाब की जमीन पर बना था, जबकि मस्जिद का एक हिस्सा सरकारी जमीन पर खड़ा है.
याचिका में राज्य सरकार, संभल के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम), तहसीलदार और ग्राम सभा को पक्षकार बनाया गया है.
याचिकाकर्ताओं के लिए वकील अरविंद कुमार त्रिपाठी और शशांक श्री त्रिपाठी उपस्थित हुए, जबकि राज्य की ओर से मुख्य स्थायी परामर्शदाता जेएन मौर्या और स्थायी परामर्शदाता आशीष मोहन श्रीवास्तव ने पैरवी की.