SIR का दूसरा चरण शुरू, EC की शक्ति पर SC में सुनवाई बाकी
नई दिल्ली । डेस्क: एक तरफ 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई लंबित है, उधर देशव्यापी दूसरा चरण शुरू हो गया है. चुनाव आयोग (Election Commission of India) ने भले ही इलेक्टोरल रोल के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) के दूसरे चरण की घोषणा कर दी है, जिसमें तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल और पुडुचेरी सहित 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 51 करोड़ मतदाता शामिल होंगे, लेकिन इस अभ्यास को संचालित करने की उसकी शक्ति पर सवाल अभी भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं.
याचिकाकर्ताओं ने SIR को बताया 'वोटर अधिकार का उल्लंघन'
याचिकाकर्ताओं ने SIR के पहले चरण (जो बिहार में संपन्न हुआ) को चुनौती देते हुए तर्क दिया है कि यह मौजूदा मतदाताओं को नागरिकता साबित करने के लिए गलत तरीके से बाध्य करता है. उनका दावा है कि यह अभ्यास मतदाताओं के अधिकारों का उल्लंघन करता है और मतदान कानूनों को तोड़ता है. याचिकाकर्ताओं के वकीलों, जिनमें प्रशांत भूषण और वृंदा ग्रोवर शामिल हैं, ने इसे "नागरिकता की जांच" करने का एक बहाना बताया है.
मुख्य प्रश्न: सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई में याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए दो मुख्य सवालों को रेखांकित किया था:
1-क्या चुनाव आयोग के पास "इस अभ्यास को करने की वास्तविक शक्ति" है?
2-SIR अभ्यास के लिए अपनाई जा रही "प्रक्रिया और तरीके" पर आपत्ति.
EC का पक्ष: चुनाव आयोग अनुच्छेद 324 के तहत प्राप्त अपनी पूर्ण शक्तियों (plenary powers) का हवाला देते हुए अपने अधिकार का बचाव कर रहा है.
न्यायालय का रुख और आगे की सुनवाई
जुलाई में, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को "लोकतांत्रिक गणराज्य के कामकाज की जड़" से जुड़ा एक "महत्वपूर्ण प्रश्न" बताते हुए 'मतदान के अधिकार' के सवाल पर चिंता व्यक्त की थी.
हालांकि, बाद में कोर्ट के आदेश बिहार SIR में मनमाने ढंग से मतदाताओं को बाहर न करने पर केंद्रित रहे. न्यायालय ने इस प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता लाने और आधार को पहचान के 12वें दस्तावेज़ के रूप में शामिल करने का निर्देश दिया था.
न्यायालय अब 4 नवंबर से SIR अभ्यास की संवैधानिकता पर दलीलें सुनने पर सहमत हो गया है. 9 अक्टूबर की सुनवाई में, न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने EC के वकील से मौखिक रूप से कहा था कि बिहार के अनुभव ने उन्हें "समझदार बना दिया होगा" और उन्हें देशव्यापी SIR मॉड्यूल में "कुछ सुधार" लाने चाहिए.
कुल मिलाकर, SIR का देशव्यापी विस्तार एक जमीनी हकीकत बन गया है, जबकि इसके कानूनी और संवैधानिक आधार पर अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट के सामने आना अभी बाकी है.