क्वांटम कंप्यूटर: क्या चीन ने डिजिटल सुरक्षा की 'एनक्रिप्शन' तोड़ दी?
नई दिल्ली । डेस्क: वर्तमान में आम जनता आधार, पैन, और बैंक खातों जैसी अपनी महत्वपूर्ण जानकारियों को डिजिटल माध्यमों पर 'एनक्रिप्टेड' (सुरक्षित कोड में बंद) रखकर निश्चिंत है. लेकिन विश्लेषकों के एक वर्ग का मानना है कि भविष्य में क्वांटम कंप्यूटर इस सुरक्षा के ताले को आसानी से तोड़ सकते हैं.
पश्चिमी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, चीन इस दौड़ में काफी आगे निकल चुका है, जिससे डिजिटल सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है.
रिपोर्ट्स के अनुसार, चीनी प्रौद्योगिकीविदों ने पहले ही 72 क्यूबिट का 'यूकोंग' (Yu Kong) नामक एक क्वांटम कंप्यूटर विकसित कर लिया है. सूत्रों का दावा है कि इस कंप्यूटर का उपयोग करके उन्होंने कई 'एनक्रिप्टेड' जानकारी तक पहुँच हासिल कर ली है.
'एनक्रिप्शन' को तोड़ने के लिए, जो कि ग्राहक के अलावा किसी को भी जानकारी देखने या पढ़ने से रोकता है, क्वांटम कंप्यूटर एक साथ अरबों संयोजन (Combinations) पर काम करने की क्षमता रखता है. विश्लेषकों के अनुसार, वर्तमान 'एनक्रिप्शन' प्रणाली क्वांटम कंप्यूटर के सामने एक भ्रम (Façade) साबित हो सकती है.
इस बीच, संयुक्त राज्य अमेरिका भी चुप नहीं बैठा है. अमेरिका ने डिजिटल डेटा की सुरक्षा के लिए 'पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी' (Post-Quantum Cryptography) विकसित की है. वहाँ की सरकार ने टेक कंपनियों, बैंकों और शेयर बाजारों जैसी संस्थाओं के लिए इस तकनीक को अनिवार्य कर दिया है. इसका उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना लगाया जा रहा है. हालांकि, तकनीकी विशेषज्ञों का एक वर्ग दावा करता है कि अमेरिकी शोधकर्ता अभी भी चीनी क्वांटम कंप्यूटर के हार्डवेयर में क्यूबिट की संख्या को पार नहीं कर पाए हैं.
भारत कहाँ खड़ा है?
क्वांटम प्रौद्योगिकी की दौड़ में भारत ने भी कदम रखा है. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार 'नेशनल मिशन ऑफ क्वांटम टेक्नोलॉजी' परियोजना में अपना आवंटन (Budget) लगातार बढ़ा रही है.
गैजेट विश्लेषकों का मानना है कि क्वांटम कंप्यूटर आने वाले समय में दुनिया को बदल कर रख देगा. चीन ने जहां 'एनक्रिप्शन' के ताले को तोड़ने की क्षमता हासिल कर ली है, वहीं अमेरिका डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है. इसके अलावा, यूरोपीय देश क्वांटम कंप्यूटर के लिए नए कानून बनाने की आवश्यकता पर चर्चा कर रहे हैं.