'ईरान में सत्ता परिवर्तन के लिए राष्ट्रपति ट्रंप और मैं पूरी तरह प्रतिबद्ध': बेंजामिन नेतन्याहू
इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि वह और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान में शासन को खत्म करने के लक्ष्य पर एक साथ काम कर रहे हैं. इस बयान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों पर धमाके और राजनयिक हलचलों ने पूरे मध्य पूर्व में सैन्य और आर्थिक तनाव बढ़ा दिया है.
नई दिल्ली । डेस्क: इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि वह और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के मौजूदा शासन को पूरी तरह समाप्त करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं. नेतन्याहू के अनुसार, उन्होंने हाल ही में इस विषय पर अमेरिकी राष्ट्रपति से विस्तृत चर्चा की है. उत्तरी इज़राइल में एक कार्यक्रम के दौरान नेतन्याहू ने कहा कि ईरान इस क्षेत्र में जारी हिंसा की मुख्य जड़ है और जब तक तेहरान का मौजूदा शासन समाप्त नहीं होता, तब तक क्षेत्र में शांति संभव नहीं है. उनका मानना है कि ईरान के शासन का पतन होते ही हिज़्बुल्ला जैसे संगठन खुद-ब-खुद कमजोर पड़ जाएंगे और लेबनान के साथ भी शांति का मार्ग प्रशस्त होगा.
होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंग धमाके और दावे-प्रतिदावे
इस राजनीतिक बयानबाजी के बीच फारस की खाड़ी में स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है. इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का दावा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में उनकी बिछाई गई समुद्री सुरंगों से टकराने के बाद दो तेल टैंकरों में भीषण आग लग गई. IRGC ने स्पष्ट किया है कि यह जलमार्ग पारगमन के लिए पूरी तरह बंद है और अमेरिका का यह दावा गलत है कि इस मार्ग से तेल की आवाजाही सामान्य रूप से जारी है. हालांकि, अमेरिकी मध्य कमान (US CENTCOM) ने ईरान के इन दावों को खारिज करते हुए इसे गलत करार दिया है. दूसरी ओर, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट का कहना है कि ईरान से तेल की खेप पूरी तरह रुक चुकी है और ईरान जल्द ही गंभीर आर्थिक संकट का सामना करने वाला है.
सैन्य हलचल और अमेरिकी रुख पर संशय
अमेरिकी व्हाइट हाउस की उप प्रेस सचिव अन्ना केली ने अल जज़ीरा से बात करते हुए स्पष्ट किया कि आगामी 3 नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले इज़राइल और अमेरिका द्वारा संयुक्त रूप से ईरानी नेतृत्व को निशाना बनाने की कोई नई योजना नहीं है. इसके बावजूद विशेषज्ञों में इस रुख को लेकर गहरा संदेह बना हुआ है. इसका मुख्य कारण क्षेत्र में अमेरिकी विमानवाहक पोत (Carrier Strike Groups) की मौजूदगी और पेंटागन के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ का हाल ही में हुआ अघोषित इज़राइल दौरा है. इस गुप्त दौरे में हेगसेथ ने नेतन्याहू और इज़राइली रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ से मुलाकात की, जिसे इज़राइली मीडिया में लीक होने के बाद ही सार्वजनिक किया गया.
ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया और बातचीत के लिए शर्तें
इज़राइल और अमेरिका के आक्रामक बयानों पर ईरान ने कड़ा रुख अपनाया है. ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने चेतावनी दी है कि यदि नया युद्ध छिड़ता है, तो इससे पूरा क्षेत्र तबाह हो जाएगा. पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर के साथ तेहरान में हुई बैठक के दौरान पेज़ेश्कियान ने साफ कहा कि किसी भी बातचीत से पहले अमेरिका को सभी दबाव, धमकियां और प्रतिबंध हटाने होंगे. उन्होंने कहा कि ईरानी जनता अब अमेरिका पर भरोसा नहीं करती. इसके साथ ही ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख मोहसिन रज़ाई और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालिबाफ ने भी दोहराया कि ईरान का समृद्ध परमाणु ईंधन किसी भी कीमत पर देश से बाहर नहीं जाएगा और अमेरिका जब तक न्यूयॉर्क में रखी गई सात शर्तों को पूरा नहीं करता, तब तक कोई नई वार्ता संभव नहीं है.
मैक्रों का कतर दौरा और मध्य पूर्व का ऊर्जा संकट
वैश्विक स्तर पर बढ़ते इस तनाव के बीच फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों कतर के दौरे पर हैं. इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य रक्षा सहयोग, बढ़ती ऊर्जा कीमतों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा करना है. होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने और वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में आए उछाल के बीच मैक्रों का यह दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. फ्रांस इस यात्रा के जरिए गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) देशों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करने और संभावित सैन्य टकराव के आर्थिक प्रभावों को कम करने की कोशिश कर रहा है.