पर्सनल लोन होगा सस्ता
नई दिल्ली । डेस्क: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट घटाकर 5.25 करने के हालिया फैसले को कर्जदारों, खासकर पर्सनल लोन लेने की योजना बना रहे लोगों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है. ऋण की लागत कम होने से बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFCs) धीरे-धीरे ब्याज दरों में मामूली कटौती कर सकती हैं, जिससे भविष्य में ऋण का बोझ कुछ कम होगा.
रेपो रेट कम होने से बैंकों के लिए फंड जुटाने की लागत घटती है. नतीजतन, वे धीरे-धीरे ग्राहकों के लिए कम ब्याज पर व्यक्तिगत ऋण की पेशकश कर सकते हैं. हालांकि यह बदलाव तुरंत लागू नहीं हो सकता है, लेकिन आने वाले कुछ हफ्तों में ऋणदाता नई नीति के माहौल के अनुसार ब्याज दरों को समायोजित कर सकते हैं.
रेपो रेट को 5.25 पर लाने का निर्णय एक वृद्धि-उन्मुख नीतिगत बदलाव का संकेत देता है. यह डिजिटल ऋणदाताओं और NBFCs के लिए लिक्विडिटी बढ़ाता है, पूंजी जुटाने की लागत कम करता है और उन्हें अधिक तेज, प्रभावी और ग्राहक-अनुकूल सेवाएं देने का अवसर प्रदान करता है. डिजिटल लेंडर्स और NBFCs ज्यादातर उधार लिए गए धन पर निर्भर करते हैं. रेपो रेट में कमी से उनकी उधार लेने की लागत भी कम होती है, जिससे वे आसानी से ग्राहकों को ऋण दे सकते हैं.
विशेषज्ञों को उम्मीद है कि इस वजह से छोटी राशि के आपातकालीन ऋण या अल्पकालिक व्यक्तिगत ऋण प्राप्त करना अपेक्षाकृत आसान हो जाएगा. अनुकूल ब्याज दर का माहौल जिम्मेदार जोखिम लेने को भी प्रोत्साहित करता है. इससे डिजिटल लेंडिंग सेक्टर अधिक लचीले और किफायती ऋण उत्पाद तैयार कर सकता है.
ऋण की लागत कम होने से कम आय वाले परिवारों को भी लाभ होगा, खासकर वे जो माइक्रोफाइनेंस ऋण पर निर्भर हैं. पिछले कुछ वर्षों में इस वर्ग के कई ग्राहक किश्त चुकाने के दबाव में थे. रेपो रेट में कटौती इस दबाव को कुछ हद तक कम करने में मदद करेगी. माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र में यह दर कटौती एक समय पर मिली राहत है, जो कम आय वाले परिवारों की वित्तीय रिकवरी में सहायता करेगी और 2025 में सकारात्मक प्रभाव बनाए रखेगी.
ब्याज दरें कम होने से वेतनभोगी और स्व-नियोजित (सेल्फ-एम्प्लॉयड) व्यक्तियों के बीच पर्सनल लोन की मांग बढ़ सकती है. खासकर, जो लोग त्वरित, आसान और कम दस्तावेज़ीकरण वाले ऋण के लिए NBFCs पर निर्भर करते हैं, उनके लिए यह और भी सुविधाजनक होगा.
ब्याज दरों में कमी से उपभोक्ता विश्वास बढ़ता है. इससे छोटी राशि के और अल्पकालिक व्यक्तिगत ऋण की मांग बढ़ेगी, क्योंकि लोगों के मासिक बजट पर कुछ राहत बनती है. MPC का निर्णय आर्थिक गतिविधियों का समर्थन करने के साथ-साथ वित्तीय स्थिरता भी सुनिश्चित करना चाहता है. इसके परिणामस्वरूप, कर्जदारों को कम EMI, आसान ऋण उपलब्धता और भविष्य की वित्तीय योजनाओं में अधिक आत्मविश्वास मिल सकता है.
यह नीतिगत रोडमैप वित्तीय स्थिरता के साथ-साथ विकास को प्राथमिकता देता है.
सभी ऋणदाता एक ही समय में ब्याज दरों को कम नहीं करेंगे. हालांकि, समग्र रुझान संकेत दे रहा है कि अगले कुछ हफ्तों में व्यक्तिगत ऋण की लागत कम होने की प्रबल संभावना है. जो लोग पर्सनल लोन लेने की सोच रहे हैं, उनके लिए यह एक फायदेमंद समय हो सकता है.