क्या उम्र को पीछे मोड़ा जा सकता है?
सीजीखबर डेस्क: क्या मानव शरीर की बढ़ती उम्र को थामना या कुछ हद तक पीछे ले जाना संभव है? इसी सवाल पर केंद्रित एक नई वैज्ञानिक शोध ने उम्र और उससे जुड़ी बीमारियों को लेकर उम्मीद जगाई है. हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने ऐसी एक प्रयोगात्मक तकनीक की जानकारी दी है, जिससे मानव कोशिकाओं की जैविक उम्र को आंशिक रूप से “रीसेट” करने की संभावना दिखाई दे रही है.
शोध के अनुसार, उम्र बढ़ने के साथ कोशिकाओं में डीएनए क्षति, जीन की सक्रियता में बदलाव और कोशिका विभाजन की गति धीमी हो जाती है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि कोशिकाओं में मौजूद कुछ एपिजेनेटिक संकेतों को नियंत्रित रूप से बदला जाए, तो वे फिर से युवा कोशिकाओं की तरह व्यवहार कर सकती हैं.
इस प्रक्रिया को “आंशिक री-प्रोग्रामिंग” कहा जा रहा है, जिसमें कोशिकाओं की पहचान को बदले बिना केवल उम्र से जुड़ी क्षति को कम करने का प्रयास किया जाता है.
अब तक यह प्रयोग जानवरों तक सीमित है. प्रयोगशाला में चूहों पर किए गए परीक्षणों में आंख, मांसपेशी और तंत्रिका ऊतकों की कार्यक्षमता में सुधार देखा गया है.
हालांकि मानव शरीर पर इसका प्रयोग करने से पहले वैज्ञानिक बेहद सतर्क हैं, क्योंकि जीन प्रक्रिया में हस्तक्षेप से कैंसर जैसे गंभीर जोखिम भी हो सकते हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार, इस शोध का उद्देश्य मानव को “अमर” बनाना नहीं है, बल्कि अल्ज़ाइमर, पार्किंसन, हृदय रोग और मांसपेशियों की कमजोरी जैसी उम्रजनित बीमारियों की शुरुआत को टालना या उनकी गंभीरता को कम करना है.
यदि कोशिकाओं को कुछ हद तक युवा बनाए रखा जा सके, तो स्वस्थ जीवनकाल यानी हेल्थस्पैन को बढ़ाया जा सकता है.