ट्रंप की H-1B वीजा पर नई सख्ती: चयन प्रक्रिया में भी कड़े बदलाव होंगे
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप H-1B वीजा नियमों में और सख्ती लाने की तैयारी कर रहे हैं. सूत्रों के अनुसार, उनकी योजना पहले से तैयार है और केवल घोषणा का इंतजार बाकी है. ट्रंप प्रशासन एक से अधिक नियमों में बदलाव ला रहा है, जिससे विदेश से अमेरिका जाने वाले कुशल कर्मचारियों के चयन की छंटनी और बारीक हो जाएगी. वर्तमान वर्ष के अंत में, दिसंबर तक नए नियमों की घोषणा होने की संभावना है.
ट्रंप ने पहले ही अमेरिकी कंपनियों पर H-1B वीजा के लिए 1 लाख डॉलर (लगभग 88 लाख रुपये) का बोझ लाद दिया है. उनका कहना है कि अब से विदेशी कुशल कर्मचारियों को नियुक्त करने वाली कंपनियों को यह राशि सरकार को जमा करनी होगी.
सूत्रों का कहना है कि अब कंपनियां किसे और कैसे नियुक्त कर रही हैं, इस प्रक्रिया में भी ट्रंप प्रशासन हस्तक्षेप करेगा. डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने H-1B वीजा व्यवस्था के लिए नई नियमावली तैयार की है, जिसका शीर्षक है 'H-1B नॉन-इमिग्रेंट वीजा क्लासिफिकेशन प्रोग्राम का सुधार'.
अब तक नॉन-इमिग्रेंट वीजा में अमेरिकी प्रशासन जो छूट देता आया था, उस पर अब लगाम कसी जाएगी. कुछ मामलों में नियोक्ताओं के खिलाफ जांच भी होगी. तीसरे पक्ष द्वारा होने वाली भर्तियों पर निगरानी बढ़ाने का प्रस्ताव भी नई नियमावली में शामिल है. विशेषज्ञों के एक वर्ग का मानना है कि अगर ट्रंप प्रशासन ये नियम लागू करता है, तो इसका असर विभिन्न विश्वविद्यालयों, गैर-लाभकारी अनुसंधान संस्थानों और स्वास्थ्य प्रतिष्ठानों पर पड़ सकता है.
नियमावली के प्रस्ताव में कहा गया है, "H-1B वीजा व्यवस्था को और बेहतर बनाने तथा अमेरिकी नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए नियमों में कुछ परिवर्तन किए जा रहे हैं."
गौरतलब है कि हर साल H-1B वीजा के जरिए भारत से बड़ी संख्या में लोग अमेरिका जाते हैं. वर्तमान में भारतीयों को इस वीजा का सबसे ज्यादा लाभ मिल रहा है. केवल पिछले साल ही 71 प्रतिशत आवेदन भारत से मंजूर हुए थे. सूची में दूसरे स्थान पर चीन है (11.7 प्रतिशत).
इसलिए, नए प्रतिबंध लागू होने पर हजारों भारतीय मुश्किल में पड़ सकते हैं. पहले से ही 88 लाख रुपये के बोझ से अमेरिका जाने की इच्छुक भारतीय परेशान हैं, और नए नियम आने पर उनका रास्ता और कठिन हो जाएगा.
फिलहाल H-1B वीजा में कर्मचारियों के चयन के लिए लॉटरी सिस्टम चल रहा है. कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ट्रंप लॉटरी सिस्टम को हटाने के इच्छुक हैं. इसके बजाय चयन वेतन के मापदंड के आधार पर हो सकता है. हालांकि, ट्रंप प्रशासन की ओर से इस पर अभी कोई पुष्टि नहीं हुई है.