पुरुषों का अंतिम सफर? Y क्रोमोसोम विलुप्ति की ओर बढ़ रहा
नई दिल्ली । डेस्क: मानव सभ्यता के विकास के साथ ही पुरुषों के लिंग निर्धारक Y क्रोमोसोम भी विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुका है. वैज्ञानिकों के अनुसार, पिछले 30 करोड़ वर्षों में इस क्रोमोसोम ने अपने 97 प्रतिशत जीन खो दिए हैं, और अगले कुछ करोड़ वर्षों में यह पूरी तरह गायब हो सकता है. लेकिन क्या इसका मतलब है कि पुरुषों का अस्तित्व खतरे में है? विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा नहीं होगा, क्योंकि प्रकृति ने पहले ही अन्य जीवों में इसका विकल्प ढूंढ लिया है.
ऑस्ट्रेलियाई जीवविज्ञानी जेनी ग्रेव्स ने 2002 में सबसे पहले इस खतरे की चेतावनी दी थी. उनके अनुसार, स्तनधारियों के पूर्वजों में X और Y क्रोमोसोम समान थे, जिनमें करीब 800 जीन थे. लेकिन 20 करोड़ वर्ष पहले Y ने लिंग निर्धारण की जिम्मेदारी संभाली, जिसके बाद यह X से अलग हो गया. परिणामस्वरूप, Y में जीनों का लगातार क्षय शुरू हो गया, जबकि महिलाओं के दो X क्रोमोसोम एक-दूसरे से जुड़कर मजबूत बने रहे. आज Y में मात्र तीन प्रतिशत जीन बचे हैं.
ग्रेव्स कहती हैं, "Y के बिना भी पुरुष बने रहेंगे. अगले 50-60 लाख वर्षों में कोई नया क्रोमोसोम इसकी जगह ले लेगा, ठीक वैसे ही जैसे कुछ चूहों की प्रजातियों में हो चुका है."
उदाहरण के तौर पर, एलोबियास टैल्पिना, एलोबियास टैंक्रेई और एलोबियास एलाइकस जैसे चूहों में Y क्रोमोसोम पूरी तरह गायब हो चुका है. इसके बजाय अन्य क्रोमोसोम ने लिंग निर्धारण की भूमिका निभानी शुरू कर दी है. इसी तरह, टोकुदाइया ओसिमेसिस चूहे में नया क्रोमोसोम Y की जगह ले चुका है.
ग्रेव्स का दावा है कि मानवों में भी यही प्रक्रिया चल रही हो सकती है, और शायद किसी दूरदराज के समुदाय में यह पहले ही शुरू हो चुका हो. "Y के महत्वपूर्ण जीन अगर किसी अन्य क्रोमोसोम में स्थानांतरित हो जाएं, तो पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ेगा," वे जोड़ती हैं.
हालांकि, इस सिद्धांत पर वैज्ञानिक समुदाय दो हिस्सों में बंटा हुआ है. ब्रिटिश जीवविज्ञानी जेन ह्यूजेस जैसे विशेषज्ञ Y की स्थिरता पर भरोसा करते हैं. 2012 में ह्यूजेस ने आंकड़ों से साबित किया कि पिछले 2.5 करोड़ वर्षों में Y से जीनों का नुकसान बहुत कम हुआ है.
"शुरुआती दौर में क्षय तेज था, लेकिन अब यह रुक चुका है. Y के जीन मानव शरीर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, इसलिए शरीर इन्हें आसानी से नहीं खोने देगा," ह्यूजेस का कहना है. उनके अध्ययन से पता चला कि कई स्तनधारियों में Y स्थिर हो चुका है, और कोई नया जीन खोने की घटना नहीं हुई.
ग्रेव्स इस तर्क को खारिज करती हैं. उनका कहना है कि हाल ही में Y में नए जीन बन रहे हैं, लेकिन वे ज्यादातर निष्क्रिय हैं-यह विलुप्ति का स्पष्ट संकेत है.
विवर्तनवादियों के मुताबिक, यह प्रक्रिया प्राकृतिक चयन का हिस्सा है, जो जीवों को नई चुनौतियों के लिए अनुकूलित करता है. फिर भी, सवाल बरकरार है: क्या मानव सभ्यता लिंग संतुलन खो देगी?
विशेषज्ञों का आश्वासन है कि प्रकृति ने हमेशा संतुलन बनाए रखा है, और Y के बिना भी मानव प्रजाति फलती-फूलती रहेगी.
यह बहस न केवल विज्ञान को, बल्कि मानव अस्तित्व की गहराइयों को भी छूती है. जैसे-जैसे अनुसंधान आगे बढ़ेगा, शायद हमें Y के भविष्य का सटीक चित्र मिले. तब तक, पुरुषों को चिंता करने की जरूरत नहीं विवर्तन उनका साथ नहीं छोड़ेगा.