चीन का मजबूत निर्यात घरेलू मांग में आ रही गिरावट को संभालने में अक्षम
नई दिल्ली । डेस्क: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने साल 2026 के लिए चीन की आर्थिक विकास दर के अनुमान में 0.1 प्रतिशत की कटौती करते हुए इसे 4.5 प्रतिशत कर दिया है. संगठन ने चेतावनी जारी की है कि चीन का मजबूत निर्यात प्रदर्शन अब घरेलू मांग में आ रही लगातार गिरावट की भरपाई करने में पूरी तरह सक्षम नहीं रह गया है. यह संशोधित अनुमान बीजिंग के चालू वर्ष के आधिकारिक विकास लक्ष्य के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है, जो जुलाई में जारी 4.6 प्रतिशत के पिछले अनुमान से कम है.
मुद्रा कोष का कहना है कि सुस्त घरेलू खपत और संपत्ति क्षेत्र में जारी संकट के कारण कमजोर पड़े निवेश के प्रभाव को निर्यात में आई तेजी केवल आंशिक रूप से ही कम कर सकी है. इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, लंबे समय से बनी अनिश्चितता और संरचनात्मक चुनौतियां चीन की आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं.
आर्थिक मंदी के इस माहौल में कच्चे तेल के भाव एक नई चिंता बनकर उभरे हैं. मुद्रा कोष का अनुमान है कि साल 2026 की अंतिम तिमाही से 2027 की पहली तिमाही के दौरान कच्चे तेल की कीमतें 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं. भंडार में सीमित गुंजाइश होने के कारण तेल के दामों में 2026 और 2027 के दौरान औसतन 17 से 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की आशंका है, जिससे चीनी अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा.
चीन ने इस वर्ष के लिए अपनी जीडीपी वृद्धि का लक्ष्य 4.5 से 5 प्रतिशत के बीच तय किया था, जो पिछले वर्षों के लगभग 5 प्रतिशत के लक्ष्य से कम है. हालांकि, दूसरी तिमाही में चीन की जीडीपी वृद्धि दर गिरकर 4.3 प्रतिशत पर आ गई, जो वर्ष 2022 के बाद का सबसे निचला स्तर है.
घरेलू स्तर पर कमजोर मांग के बीच विदेशी व्यापार ने अर्थव्यवस्था को सहारा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. अगस्त महीने में चीन का निर्यात 25 प्रतिशत बढ़कर 401.44 अरब डॉलर पर पहुंच गया. चालू वर्ष के शुरुआती आठ महीनों में चीन का संचयी व्यापार अधिशेष 3 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 805.51 अरब डॉलर दर्ज किया गया.
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का मानना है कि पिछले साल दर्ज 1.2 ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड सरप्लस के बाद इस साल व्यापार अधिशेष में और अधिक विस्तार देखने को मिल सकता है.
व्यापार में आई इस मजबूती के बावजूद चीनी आम जनता की वित्तीय स्थिति में सुधार नहीं हो पा रहा है. वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि निर्यात क्षेत्र में बढ़ता पूंजीकरण रोजगार और घरेलू आय बढ़ाने में ज्यादा मददगार साबित नहीं हो पा रहा है. इस वजह से निर्यात की मजबूती का लाभ व्यापक घरेलू मांग में तब्दील नहीं हो सका है.
मंदी की मार से निपटने के लिए बीजिंग ने मौद्रिक सुधारों की गति तेज कर दी है. इसके तहत नीतिगत बैंकों की ब्याज दरों में कटौती, होमबायर्स को मॉर्गेज सब्सिडी और स्थानीय कर्ज कोटा जारी करने जैसे कदम उठाए गए हैं. विश्लेषकों को उम्मीद है कि इन उपायों से अंतिम तिमाही में कुछ सुधार दिख सकता है, लेकिन संपत्ति बाजार के संकट और कमजोर उपभोक्ता विश्वास के चलते घरेलू मांग पर दबाव बना रहेगा.