रवि, 18 अक्टू. 2026

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बांग्लादेश में क्या एक और सत्ता परिवर्तन होगा?

चुनाव से पहले बांग्लादेश जल रहा है, क्या एक और सत्ता परिवर्तन होगा?

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23 दिस. 2025, 05:56 PM 5 मिनट में पढ़ें 2

मोहम्मद युनूस- शेख हसीना
मोहम्मद युनूस- शेख हसीना

रायपुर । विशेष संवाददाता: अगले साल 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव से ठीक पहले बांग्लादेश में आग की लपटें सुलग रही हैं. जुलाई आंदोलन के प्रमुख चेहरे ओसमान हादी की हत्या ने पूरे देश को हिंसा की चपेट में डाल दिया है. तोड़फोड़, आगजनी और खूनी झड़पें सब कुछ हो रहा है. क्या यह हालात फिर से सत्ता परिवर्तन की ओर इशारा कर रहे हैं? अंतरिम सरकार के चीफ एडवाइजर मुहम्मद यूनुस ने अमेरिकी दूत को फोन पर चेतावनी दी है कि शेख हसीना के समर्थक लाखों टका खर्च कर चुनाव बर्बाद करने की साजिश रच रहे हैं. भारत के साथ कूटनीतिक जंग भी तेज हो गई है, जहां वीजा सेंटर बंद हो गए और दूतों को तलब किया जा रहा है.


हादी की 12 दिसंबर को ढाका में गोली मारकर हत्या के बाद बृहस्पतिवार से ही देश में उफान आ गया. ढाका से लेकर शरीयतपुर तक दंगे भड़क उठे. सांस्कृतिक केंद्र जैसे छायानट और उद्दीची जला दिए गए, अखबारों के दफ्तरों पर हमले हुए. शरीयतपुर में नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) और बीएनपी की छात्र इकाई छात्रदल के बीच भिड़ंत में आठ लोग घायल हो गए, कॉकटेल ब्लास्ट भी हुए. 

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खुलना में एनसीपी के लेबर लीडर मोतलेब शिकदर पर गोली चलाई गई. यूनुस सरकार ने पुलिस को कड़ा संदेश दिया किसी भी हाल में आग बुझाओ. ढाका पुलिस कमिश्नर शेख मुहम्मद सज्जात अली ने 50 थानों के अफसरों को चेताया कि चुनाव से पहले हमले और आगजनी बढ़ सकती है. क्या यह सब मिलकर अंतरिम सरकार को हिला देगा?


यूनुस का अमेरिका को खुलासा: हसीना समर्थक साजिश रच रहे

सोमवार रात यूनुस ने अमेरिकी स्पेशल एन्वॉय सर्जियो गोरे से फोन पर आधे घंटे बात की. उन्होंने कहा, "हसीना के पलायन करने वाले समर्थक हिंसा भड़का रहे हैं और चुनाव रोकने के लिए भारी पैसा बहा रहे हैं. लेकिन हम हर चुनौती से लड़ने को तैयार हैं." उनका इशारा साफ था पूर्व पीएम शेख हसीना की अवामी लीग पर. यूनुस ने जोर दिया कि तानाशाही के दौर में छीने गए वोटिंग राइट्स को जनता वापस चाहती है. रूसी दूत अलेक्जेंडर ग्रिगोराइविच ने भी अपील की चुनाव से पहले शांति लौटाओ. अमेरिकी दूतावास ने आगाह किया कि हिंसा और तेज हो सकती है. क्या यह दबाव अंतरिम सरकार के लिए खतरे की घंटी है?


भारत-बांग्लादेश जंग: वीजा बंद, दूत तलब

चुनावी आग में भारत भी फंस गया. बांग्लादेश ने सुरक्षा का हवाला देकर दिल्ली, शिलिगुड़ी और अगरतला के वीजा सेंटर अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिए. अगरतला में सोमवार रात नोटिस आया 'अनिवार्य कारणों' से सेवाएं रुकेंगी. भारत ने पहले ढाका, राजशाही, खुलना और चटगांव में अपने सेंटर बंद किए थे, क्योंकि वहां भारतीय दफ्तरों के बाहर विरोध हुए. मंगलवार सुबह बांग्लादेश ने भारत के हाई कमिश्नर प्रणय वर्मा को विदेश मंत्रालय बुलाया. जवाब में दिल्ली ने बांग्लादेश हाई कमिश्नर एम रियाज हामिदुल्लाह को चाय पर तलब किया. यह 10 दिनों में दूसरी बार. बांग्लादेश मीडिया का आरोप भारत विरोध को बढ़ा-चढ़ाकर दिखा रहा. भारत का कहना हमारे दफ्तर सुरक्षित रहे. मयमंसिंह में हिंदू युवक दीपचंद्र दास की पिटाई और लाश जला देने की घटना ने आग में घी डाला. क्या यह सीमा पार तनाव सत्ता परिवर्तन को ट्रिगर करेगा?


संयुक्त राष्ट्र की चिंता: अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं

संयुक्त राष्ट्र ने भी चेतावनी दी. महासचिव एंतोनियो गुटेरेस के स्पोक्सपर्सन स्टीफन डुजारिक ने कहा, "बांग्लादेश में हिंसा से हम बहुत चिंतित हैं. हर नागरिक चाहे अल्पसंख्यक हो या बहुसंख्यक सुरक्षित महसूस करे. अंतरिम सरकार को तुरंत कदम उठाने चाहिए." यह दूसरा बयान है; पहले हादी हत्याकांड पर निष्पक्ष जांच की मांग हुई थी. बांग्लादेश इसे अलग घटना बता रहा, लेकिन भारत अल्पसंख्यक सुरक्षा पर सवाल उठा रहा. क्या अंतरराष्ट्रीय दबाव यूनुस सरकार को कमजोर कर देगा?


भारत में उग्र प्रदर्शन: कोलकाता-दिल्ली में झड़पें

भारत में गुस्सा फूट पड़ा. कोलकाता के बेकबागान में बांग्लादेश डिप्टी हाई कमीशन के बाहर विश्व हिंदू परिषद, भाजपा और बजरंग दल के कार्यकर्ता सड़क पर उतरे. दीपू दास हत्याकांड के खिलाफ नारे लगाए, पुलिस ने बैरिकेड लगाकर रोका. झड़प में लाठीचार्ज हुआ, कई घायल, कई हिरासत में. भाजपा नेता तमोघ्न घोष बोले, "हम अल्पसंख्यकों के हक के लिए लड़ रहे." दिल्ली में हाई कमीशन के बाहर तीन लेयर की सुरक्षा के बीच प्रदर्शनकारी बैरिकेड तोड़ने को बेताब. क्या यह आक्रोश बांग्लादेश में और अशांति फैलाएगा?


चुनाव आयोग का ऐलान: हिंसा के बावजूद वोटिंग होगी

मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिरुद्दीन ने मंगलवार को पुलिस, डीएम और अन्य अफसरों के साथ बैठक की. बोले, "हम साबित करेंगे कि निष्पक्ष चुनाव हो सकता है, लेकिन कानून का राज जरूरी." 12 फरवरी को वोटिंग और जुलाई संविधान पर जनमत संग्रह तय है. हिंसा के साए में क्या यह मिशन सफल होगा? कई लोग आशंका जता रहे क्या देरी होगी या सत्ता फिर बदलेगी?


बांग्लादेश की यह आग कब बुझेगी? अंतरिम सरकार दावा कर रही है कि चुनाव तय समय पर होगा, लेकिन हालात सत्ता परिवर्तन की आहट दे रहे हैं. दुनिया नजर रखे हुए है.


हालांकि, अब तक सत्ता परिवर्तन की मांग नहीं उठी है परन्तु हिंसा जिस तरह से फैल रही है उसके आधार पर कहना मुश्किल है कि यह कब अपनी राह बदल ले. अवामी लीग की शेख हसीना भारत में रह रही है. उसके बाद भी मोहम्मद युनूस आरोप लगा रहें हैं कि उनकी पार्टी इन सब के पीछे पैसा खर्च कर रही है. एक और ऐंगल है कि अवामी लीग को चुनाव लड़ने से बाहर कर दिया गया है. 12 फरवरी के चुनाव लड़कर वह सत्ता में वापसी नहीं कर सकती है. लेकिन इतना जरूर है कि यदि इसी तरह से बांग्लादेश जलता रहे तो बाहर की शक्तियों को हस्तक्षेप करना पड़ सकता है. और बाहरी हस्तक्षेप अपने साथ अपने पसंदीदा शख्स को सत्तारूढ़ होते देखना पसंद करती है.


गौर करने वाली बात यह है कि खुद मोहम्मद युनूस भी इसी तरह के हिंसा के बाद सत्तारूढ़ हुये थे. अब फिर से हिंसा हो रही है तथा बेलगाम है, इससे वर्तमान सत्ता के लिये खतरा पैदा हो गया है, यह जाहिर है. बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन होना पड़ोसी देश के लिये सुखमय होगा. 

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP