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CEC ज्ञानेश कुमार की Z-Plus सुरक्षा में अतिरिक्त बल तैनात

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09 अक्टू. 2026, 07:26 AM 4 मिनट में पढ़ें 1

ज्ञानेश कुमार CEC
ज्ञानेश कुमार CEC

नई दिल्ली । डेस्क: मतदाता सूची में कथित हेरफेर और 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर बढ़ते राजनीतिक बवाल और विरोध-प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया है. गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, संभावित खतरों के आकलन और राजधानी में मौजूदा सुरक्षा स्थितियों की समीक्षा के बाद उनकी मौजूदा Z-प्लस सुरक्षा व्यवस्था में अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है.


सुरक्षा एजेंसियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास, अशोक रोड स्थित निर्वाचन सदन (चुनाव आयोग मुख्यालय) और आगरा स्थित उनके पैतृक घर पर सुरक्षा का दायरा बढ़ा दिया है. 


दिल्ली के न्यू मोती बाग स्थित उनके सरकारी आवास पर अब 24 घंटे पुलिस और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवानों का कड़ा पहरा रहेगा. इसके साथ ही CISF ने अपने रिजर्व पूल से अतिरिक्त जवान तैनात कर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बना दिया है.


यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब विपक्षी दलों के 'इंडिया' गठबंधन द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर देशव्यापी प्रदर्शन किए जा रहे हैं. 


बुधवार को प्रदर्शनकारियों ने ज्ञानेश कुमार के दिल्ली स्थित आवास में घुसने का प्रयास किया था, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था. 


इससे पहले 28 सितंबर को आगरा में उनके पैतृक घर के बाहर भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध-प्रदर्शन और नारेबाजी की गई थी. 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर होने वाले बड़े प्रदर्शनों की घोषणा को देखते हुए सुरक्षाबल पूरी तरह सतर्क हैं और केंद्रीय बलों की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात कर दी गई हैं.


भारत में कितने श्रेणियों की सुरक्षा प्रदान की जाती है-


गौरतलब है कि भारत में वीआईपी, नेताओं, संवैधानिक अधिकारियों और विशिष्ट व्यक्तियों को संभावित खतरे के आकलन (थ्रेट परसेप्शन) के आधार पर गृह मंत्रालय और खुफिया एजेंसियों (जैसे आईबी) की समीक्षा के बाद मुख्य रूप से छह श्रेणियों में सुरक्षा प्रदान की जाती है:


सबसे शीर्ष स्तर की सुरक्षा एसपीजी (विशेष सुरक्षा समूह - SPG) होती है, जो विशेष रूप से केवल देश के प्रधानमंत्री और उनके साथ रहने वाले निकटतम परिजनों के लिए आरक्षित होती है. इस बल के जवानों की संख्या और विशिष्ट विवरण को गोपनीय रखा जाता है, लेकिन इसमें हजारों की संख्या में विशेष प्रशिक्षित कमांडो तैनात रहते हैं.


दूसरे स्तर पर Z-प्लस (Z+) श्रेणी आती है, जो देश में दी जाने वाली दूसरी सबसे उच्च स्तरीय सुरक्षा है. इसमें कुल मिलाकर लगभग 55 सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं, जिनमें सीआरपीएफ, सीआईएसएफ या आईटीबीपी जैसे केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवान शामिल होते हैं. इसके साथ ही इसमें बुलेटप्रूफ गाड़ियां और एस्कॉर्ट वाहन भी शामिल रहते हैं.


तीसरी श्रेणी Z (ज़ेड) श्रेणी है, जिसके तहत संबंधित व्यक्ति को सुरक्षा प्रदान करने के लिए कुल 22 सुरक्षाकर्मियों का घेरा दिया जाता है. इसमें सशस्त्र पुलिसकर्मियों के साथ-साथ पीएसओ (पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर) और एस्कॉर्ट गाड़ियां तैनात रहती हैं.


चौथी श्रेणी Y-प्लस (Y+) श्रेणी होती है, जिसमें लगभग 11 सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाते हैं. इसमें आमतौर पर 2 से 4 कमांडो या पीएसओ शामिल होते हैं जो चौबीसों घंटे पाली के हिसाब से सुरक्षा में रहते हैं, जबकि बाकी जवान आवास की सुरक्षा संभालते हैं.


पांचवीं श्रेणी Y (वाई) श्रेणी है, जिसमें कुल मिलाकर 8 सुरक्षाकर्मी शामिल होते हैं. इनमें से 1 या 2 पीएसओ घूमते-फिरते समय व्यक्ति के साथ रहते हैं और शेष जवान आवास की सुरक्षा में तैनात रहते हैं.


छठी और सबसे बुनियादी श्रेणी X (एक्स) श्रेणी होती है, जिसमें केवल 2 सुरक्षाकर्मी दिए जाते हैं. इनमें कोई विशेष कमांडो दस्ता नहीं होता, बल्कि केवल सशस्त्र पुलिस जवान या पीएसओ शामिल होते हैं. इन सभी सुरक्षा घेरों में तैनात सुरक्षाकर्मियों की वास्तविक तैनाती खुफिया रिपोर्ट और समय-समय पर होने वाले खतरे के पुनर्मूल्यांकन के आधार पर घटाई या बढ़ाई भी जा सकती है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP