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दवा निर्माण से पहले कच्चे माल की जांच अनिवार्य-CDSCO

CDSCO का राज्यों को निर्देश: दवा निर्माण से पहले कच्चे माल की जांच अनिवार्य

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10 अक्टू. 2025, 04:27 AM 4 मिनट में पढ़ें 1

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नई दिल्ली । डेस्क: CDSCO ने राज्यों को निर्देश दिया है कि दवा निर्माण से पहले कच्चे माल की जांच अनिवार्य तौर पर की जाये. खांसी की सिरप से जुड़ी हालिया गुणवत्ता समस्याओं से चिंतित केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के औषधि नियंत्रकों को निर्देश जारी किए हैं कि दवा निर्माण और बाजार में रिलीज से पहले कच्चे माल तथा सहायक सामग्री (एक्सीपिएंट्स) की जांच सुनिश्चित की जाए.


CDSCO ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के औषधि नियंत्रकों को एक पत्र में मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में दूषित खांसी की सिरप से कथित रूप से जुड़ी बच्चों की मौतों तथा खांसी की सिरप की गुणवत्ता संबंधी चिंताओं का उल्लेख किया है.


पत्र में कहा गया है कि निर्माण सुविधाओं के निरीक्षणों तथा 'नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी' (NSQ) घोषित दवाओं की जांच के दौरान पाया गया कि "निर्माता प्रत्येक बैच की सहायक/निष्क्रिय तथा सक्रिय औषधीय सामग्री की निर्धारित मानकों के अनुपालन की जांच किए बिना उन्हें फॉर्मूलेशन निर्माण तथा तैयार उत्पादों में उपयोग कर रहे हैं."


"यह निदेशालय समय-समय पर औषधीय फॉर्मूलेशन के निर्माण में उपयोग से पहले कच्चे माल सहित सहायक सामग्री की जांच की महत्वपूर्णता पर जोर देता रहा है," पत्र में कहा गया.


इस संदर्भ में, CDSCO ने औषधि नियमों के अनुसार, जिसमें नियम 74 (सी) तथा नियम 78 (सी) (द्वितीय) शामिल हैं, उल्लेख किया कि लाइसेंसधारी को अपने स्वयं के प्रयोगशाला या लाइसेंसिंग प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित किसी भी प्रयोगशाला में अपने उत्पाद के निर्माण के लिए उपयोग किए जाने वाले कच्चे माल के प्रत्येक बैच या लॉट तथा अंतिम उत्पाद के प्रत्येक बैच की जांच करनी चाहिए तथा अनुसूची यू में निर्दिष्ट विवरणों के साथ रिकॉर्ड या रजिस्टर रखने चाहिए.


भारत के औषधि नियंत्रक महानिदेशक (DGCI) डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी ने कहा, "सभी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश औषधि नियंत्रकों से अनुरोध है कि निरीक्षणों के दौरान निगरानी, निर्माताओं को परिपत्रों के माध्यम से जागरूक करने आदि के जरिए निर्माण तथा बाजार में बैच रिलीज से पहले जांच सुनिश्चित करने के उपाय उठाएं."


उन्होंने आगे कहा, "इसके अलावा, यह भी सुनिश्चित किया जाए कि निर्माताओं के पास मजबूत विक्रेता योग्यता प्रणाली हो तथा वे विश्वसनीय अनुमोदित विक्रेताओं से ही कच्चे माल सहित सहायक सामग्री का उपयोग करें."


रिपोर्टों के अनुसार, हाल के हफ्तों में मध्य प्रदेश में कम से कम सात बच्चों की किडनी फेलियर से मौत हो गई, जो कथित रूप से दूषित खांसी की सिरप से जुड़ी थी, जबकि राजस्थान में कुछ दवाओं के प्रशासन से प्रतिकूल प्रतिक्रियाएं भी दर्ज की गईं.


इस महीने की शुरुआत में इन रिपोर्टों के बाद, केंद्रीय तथा राज्य औषधि नियामकों ने न केवल मध्य प्रदेश बल्कि अन्य राज्यों में नमूनों की जांच शुरू की. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि 3 अक्टूबर को 6 राज्यों में फैले 19 दवाओं के निर्माण स्थलों पर जोखिम आधारित निरीक्षण (आरबीआई) शुरू किया गया है.


मंत्रालय ने सूचित किया कि मध्य प्रदेश में जांचे गए नमूनों में गंभीर किडनी क्षति का कारण बनने वाले ज्ञात संदूषकों का कोई अंश नहीं पाया गया. हालांकि, 19 दवा नमूनों तथा जिन निर्माण स्थलों पर आरबीआई किया गया, उनके विवरणों का खुलासा नहीं किया गया.


तमिलनाडु के कांचीपुरम में स्रेसन फार्मा से प्राप्त कोल्ड्रिफ खांसी सिरप के नमूनों की जांच में औषधि नियामक को डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) की अनुमत सीमा से अधिक मात्रा पाई गई.


केंद्रीय औषधि नियामक ने निरीक्षण निष्कर्षों के आधार पर कोल्ड्रिफ खांसी सिरप के निर्माता का निर्माण लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश की है. अधिकारियों ने बताया कि आपराधिक कार्यवाही भी शुरू कर दी गई है.


केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा राज्य सरकार अधिकारियों तथा स्वास्थ्य, औषधि नियामक प्राधिकरणों के अधिकारियों के साथ आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में भी सभी औषधि निर्माताओं द्वारा संशोधित अनुसूची एम - संशोधित गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज (जीएमपी) का सख्त अनुपालन तथा मानकों का पालन न करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई पर जोर दिया गया.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP