मिड-डे-मील पर महंगाई हावी

Wednesday, November 27, 2013

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सब्जियां

रायपुर | एजेंसी: छत्तीसगढ़ के ज्यादातर स्कूलों में छात्रों को मध्याह्न् भोजन में इन दिनों सिर्फ कुम्हड़ा, लौकी, बंदगोभी नसीब हो रहा है. सब्जियों की महंगाई के कारण अलग-अलग तरह की सब्जी नहीं परोसी जा रही है. रोजाना एक तरह की सब्जी मिलने से छात्रों में मायूसी है. सूबे के ज्यादातर स्कूलों में मध्याह्न् भोजन योजना पर महंगाई का ग्रहण मंडरा रहा है. छात्र-छात्राओं को चावल-दाल तो बराबर मिल रहा है, लेकिन अच्छी सब्जी चखने के लिए छात्र तरस गए हैं.

प्रदेश की अधिकांश जगहों पर पखवाड़ेभर से सब्जियों के दर आसमान पर हैं. महंगी सब्जियों को लेकर मध्याह्न् भोजन बनाने वाले संगठन सस्ती सब्जियां ही परोस रहे हैं. उनका कहना है कि टमाटर, गोभी, सेम, भिंडी, करेला, बरबट्टी 40 रुपये है. बैगन 30, आलू 25 व प्याज 40 रुपये प्रति किलो है. इस स्थिति में महंगी सब्जियां बच्चों को खिला पाना संभव नहीं है. चना, आलू, कुम्हड़ा, बंदगोभी, लौकी से ही काम चला रहे हैं.

प्रदेश में यह स्थिति शहर व ग्रामीण दोनों जगह के स्कूलों का है. कई ग्रामीण स्कूलों में तो सब्जी ही नहीं बांटी जा रही है. धमतरी जिले के डूबान एवं वनांचल के छात्रों को तो सब्जी नसीब नहीं हो रहा है.

जब शहर व गांव के कुछ स्कूलों का जायजा लिया गया तो पाया कि किसी स्कूल में पत्तागोभी, लौकी व कुम्हड़ा के अलावा अन्य सब्जी नहीं बंटी. छात्रों ने बताया कि यही स्थिति महीनों से है. धमतरी के 70 स्कूलों में गोकुलपुर स्थित किचन शेड से मध्याह्न् भोजन सप्लाई होती है.

गत सोमवार को यहां बंदगोभी की सब्जी बनी. बीते शनिवार को चना तथा शुक्रवार को फिर बंदगोभी परोसी गई. ग्राम शंकरदाह प्राथमिक व माध्यमिक स्कूल में सोमवार को कुम्हड़ा परोसा गया. बीते शनिवार भी यहां कुम्हड़ा बना था तथा शुक्रवार को पत्तागोभी की सब्जी छात्रों को मिली थी. हरफतराई प्राथमिक शाला में सोमवार को लौकी इसके पूर्व शनिवार को बंदगोभी बंटा था. माध्यमिक स्कूल में सोमवार को पत्तागोभी तथा शनिवार को सोयाबीन बड़ी की सब्जी बनी थी.

शहर व ग्रामीण क्षेत्रों के अनेक ऐसे बच्चे होंगे, जो कुम्हड़ा, लौकी, बंदगोभी नहीं खाते. इन्हीं सब्जियों के बनने से छात्र ऊब गए हैं. नतीजतन, उनकी खुराक भी कम हो गई है. शहर के स्कूलों में ऐसी समस्या ज्यादा है. सोमवार को जालमपुर के प्राथमिक व माध्यमिक स्कूल में इसके कारण बड़ी मात्रा में भोजन बच गया, जिसे मवेशियों को खिलाया गया.

इस संबंध में धमतरी के डीईओ ए.के. भार्गव का कहना है कि मध्याह्न् भोजन की राशि का निर्धारण राष्ट्रीय स्तर से हुआ है. इसके लिए हम अलग से राशि की मांग नहीं कर सकते. अभी सब्जी महंगी है, कुछ दिनों में सस्ती हो जाएगी. महंगाई के हिसाब से सब्जी की मात्रा कम ज्यादा होती है. बहरहाल मनपसंद पौष्टिक सब्जियों के अभाव में कुछ स्कूलों के बच्चों ने भोजन करना भी बंद कर दिया हैं. कहीं इससे छात्र-छात्राओं की उपस्थिति भी प्रभावित हुई हैं.

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