खुले में शौच के खिलाफ बच्चों की मुहिम

Sunday, May 29, 2016

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खुला शौचालय

रायपुर | समाचार डेस्क: छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद प्रभावित जिले राजानंदगांव के ढोबनी गांव की 11 वर्षीय जनजातीय किशोरी आरती रावते सुबह चार बजे उठती है. पढ़ने के लिए नहीं बल्कि यह देखने के लिए गांव का कौन व्यक्ति खुले में शौच करने जा रहा है. वह तड़के उठकर ऐसे लोगों पर नजर रखती है और उन्हें खुले में शौच करने से रोकती है.

आरती का गांव खुले में शौच से मुक्त घोषित किया जा चुका है. इसका श्रेय आरती जैसे बच्चों के प्रयासों को जाता है.

आरती यूनिसेफ के अभियान ‘टीम स्वच्छ’ और एक गैर सरकारी संगठन जन कल्याण संस्थान का हिस्सा है.

आरती ने कहा, “मैं कुछ अन्य बच्चों के साथ खुले में शौच करने के लिए जाने वालों पर नजर रखती हूं. जब हम किसी को ऐसा करने के लिए जाते देखते हैं तो सीटी बजाकर उसे ऐसा करने से रोकते हैं. खुले में शौच करने वालों पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा.”

आरती के गांव के प्रत्येक घर में दो साल पहले ही शौचालय बन चुके हैं, लेकिन इससे खुले में शौच करने की समस्या खत्म नहीं हुई है.

ग्रामीणों को खुले में शौच करने की आदत को बदलने के लिए तैयार करना बहुत मुश्किल है.

हलबा जनजातीय समुदाय की आरती का कहना है कि घरों में शौचालय होने के बावजूद लोग खुले में शौच करते हैं. जिले के प्रत्येक गांव में एक निगरानी समिति बनाई गई है, जिसमें बच्चे, गांव के प्रधान सहित समुदाय के अन्य सदस्य हैं. ये सभी लोगों को खुले में शौच करने से रोकते हैं.

आरती को अंग्रेजी अच्छी लगती है और वह चिकित्सक बनना चाहती हैं. वह कहती है, “मैं इस अविकसित क्षेत्र में लोगों की सेवा करना चाहती हूं और स्वच्छता एवं स्वच्छ जीवन के बारे में लोगों को शिक्षित करना चाहती हूं.”

आरती कहती है, “मैं स्वच्छता और निजी सफाई के महत्व को समझती हूं. मेरी बड़ी बहन की शादी पास के गांव कुरुभाट में हुई है. उसके ससुराल में शौचालय नहीं है. मैंने उसके सास-ससुर को शौचालय के निर्माण और खुले में शौच नहीं करने को कहा है. अब वे मेरी और मेरी बहन की इच्छा मानकर शौचालय के निर्माण के लिए तैयार हो गए हैं.”

राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण द्वारा जारी की गई स्वच्छता स्थिति रिपोर्ट के मुताबिक, देश में आधे से अधिक ग्रामीण आबादी अभी भी खुले में शौच करती है. सर्वेक्षण के मुताबिक, अनुमानित रूप से ग्रामीण भारत में 52.1 प्रतिशत लोग खुले में शौच करते हैं, जबकि शहरी भारत में यह संख्या 7.5 प्रतिशत है.

यूनिसेफ ने दिल्ली के एक एनजीओ की मदद से 2013 में छत्तीसगढ़ के राजानंदगांव में लोगों को खुले में शौच करने से रोकने का अभियान शुरू किया था. इसके बाद स्थानीय एनजीओ भी इस अभियान से जुड़ गए.

अब खुले में शौच करने के खिलाफ अभियान सुरगुजा, धमतरी और दंतेवाड़ा सहित छत्तीसगढ़ के कई जिलों में फैल रहा है.

जन कल्याण संस्थान के प्रमुख योगेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि राजानंदगांव जिले के 300 गांव खुले में शौच की समस्या से मुक्त घोषित हो चुके हैं.

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