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पहलवानों ने गंगा में मेडल प्रवाहित करने का फ़ैसला टाला

नई दिल्ली | डेस्क : ओलंपिक मेडल विजेता पहलवानों ने अपना मेडल गंगा में प्रवाहित करने का फैसला पांच दिनों के लिए टाल दिया है. किसान नेता नरेश टिकैत को पहलवानों ने अपना मेडल सौंप दिया है.

मंगलवार को गंगा में मेडल प्रवाहित करने के लिए पहुंचे पहलवानों से किसान नेता नरेश टिकैत ने बात की और उन्हें गंगा में मेडल बहाने से रोक लिया.

राकेश टिकैत ने कहा, ”जिस तरह से जंतर-मंतर में हमारी बेटियों के साथ व्यवहार हुआ है, इसे पूरा भारत बर्दाश्त नहीं करेगा. उन्हें जिस तरह से खींच-खींचकर वहां से उठाया गया, उसे लेकर पूरे भारत में रोष है.”

उन्होंने केंद्र सरकार पर भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को बचाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, ”एक आदमी को बचाने के लिए पूरी भारत सरकार लगी हुई है.”

टिकैत ने कहा कि खिलाड़ियों ने पांच दिन का वक्त दिया. हम चुप नहीं बैठेंगे. उन्होंने खिलाड़ियों से हुई बातचीत के बारे में कहा, ”उन्हें हमने पूरा आश्वासन दिया है. हम उनका सर झुकने नहीं देंगे, उनके लिए जहां तक लड़ाई लड़नी पड़ेगी, हम लड़ेंगे.”

गौरतलब है कि कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष और भाजपा सांसद बृजभूषण सिंह के ख़िलाफ़ एक महीने से ज़्यादा वक़्त से दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना दे रहे थे. लेकिन वहां से हटाए जाने के बाद पहलवानों ने अपना मेडल गंगा में प्रवाहित करने की बात कही थी.

इन पहलवानों ने बृजभूषण सिंह पर महिला पहलवानों के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था. इनकी मांग थी कि बृजभूषण सिंह को गिरफ़्तार किया जाए.

इन पहलवानों ने एक बयान जारी कर कहा था, “28 मई को जो हुआ वो सबने देखा. पुलिस ने हमें बर्बरता से गिरफ़्तार किया. हम शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे. हमारे आंदोलन की जगह को भी पुलिस ने तहस-नहस कर के हमसे छीन लिया और अगले दिन गंभीर मामलों में हमारे ऊपर ही एफ़आईआर दर्ज कर दी गई. क्या महिला पहलवानों ने अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न के लिए न्याय मांगकर कोई अपराध कर दिया है.”


इस बयान में कहा गया, “हम महिला पहलवान ऐसा महसूस कर रही हैं कि इस देश में हमारा कुछ नहीं बचा. हमें वो पल याद आ रहे हैं जब हमने ओलंपिक, वर्ल्ड चैंपियनशिप में मेडल जीते थे. अपने आत्म सम्मान के साथ समझौता करके भी क्या जीना. ये सवाल आया कि किसे लौटाएं. हमारी राष्ट्रपति जी को, जो सिर्फ़ दो किलोमीटर दूर बैठी सब देखती रहीं, लेकिन कुछ बोली नहीं. हमारे प्रधानमंत्री जी को, जो हमें अपने घर की बेटियां बताते थे और एक बार भी सुध-बुध नहीं ली.”

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