लखीमपुर खीरी कांड पर सुप्रीम कोर्ट की नाराज़गी

नई दिल्ली | डेस्क: लखीमपुर हिंसा मामले पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की अब तक की कार्रवाई पर नाराज़गी जताई है.

बीबीसी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमन्ना ने यूपी सरकार की स्टेटस रिपोर्ट पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा कि ‘इसमें कुछ नए गवाहों को छोड़कर कुछ भी नहीं है. हमने 10 दिन दिए थे. लैब रिपोर्ट्स भी नहीं आई हैं. हमने जैसी उम्मीद की थी यह वैसे नहीं जा रही है.’


देश की सबसे बड़ी अदालत ने संकेत दिया है कि वो इस मामले की निगरानी के लिए चार्जशीट फ़ाइल होने तक रिटायर जज की नियुक्ति कर सकती है.

सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस राकेश कुमार जैन या जस्टिस रंजीत सिंह की निगरानी के लिए नियुक्ति की जा सकती है.

3 अक्तूबर को लखीमपुर खीरी में हुई इस घटना में 8 लोगों की मौत हुई थी जिनमें चार किसान थे.

इस मामले में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा समेत 10 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

दो वकीलों ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर मांग की थी कि इस मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की जानी चाहिए और इसमें सीबीआई को भी शामिल किया जाना चाहिए, जिसके बाद कोर्ट इस मामले में सुनवाई कर रहा है.

जजों ने कहा है कि इस मामले में दो एफ़आईआर का दर्ज किया जाना दिखाता है कि एक ख़ास अभियुक्त को फ़ायदा देने के लिए ऐसा किया गया.

मुख्य न्यायाधीश ने कहा है कि दो एफ़आईआर की जांच अलग-अलग की जाए. इस मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी.

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