वन विभाग उड़ायेगा पैसे, खरीदेगा ड्रोन

रायपुर | संवाददाता: वन विभाग जल्दी ही ड्रोन खरीदने वाला है.हरेक ड्रोन के लिये विभाग ढाई से तीन लाख रुपये तक खर्च करेगा. आरंभिक तौर पर कम से कम 38 ड्रोन खरीदने की योजना है. इसके बाद सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो ड्रोन खरीदी के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करने की तैयारी है.

पहले ड्रोन पर खर्च किये जाने की योजना है और उसके बाद कई-कई दौर में इसके लिये वन अमले को प्रशिक्षित किया जायेगा, जिस पर करोड़ों खर्च किये जायेंगे.


लेकिन यह ड्रोन क्यों खरीदा जा रहा है, इसका जवाब किसी के पास नहीं है. आरोप है कि राज्य के वन मंत्री के एक करीबी को लाभ पहुंचाने के लिये यह गैरजरुरी खर्च किया जा रहा है. सत्ता में अच्छी पहुंच रखने वाले इस शख्स के कारण वन विभाग लगातार अनाप-शनाप खरीदी करता रहा है. हालांकि कुछ अधिकारी अनाधिकृत तौर पर दावा कर रहे हैं कि वनों की हालत जानने के लिये यह खरीदी की जा रही है.

दिलचस्प ये है कि राज्य में वन विभाग के पास वन प्रबंधन सूचना प्रणाली नामक एक बड़ा अमला है. वन प्रबंधन सूचना प्रणाली यानी एफएमआईएस के सहारे पूरे राज्य में वनों की जानकारी पलक झपकते मिल जाती है. सेटेलाइट के सहारे एक-एक आंकड़ा उपलब्ध हो जाता है. यहां तक कि गूगल पर भी ऐसी तमाम जानकारियां उपलब्ध हैं. फिर लाख टके का सवाल है कि आखिर एक ड्रोन से किस हद तक वनों की निगरानी की जा सकती है.

इसके अलावा वन विभाग का अधिकांश इलाका ऐसा है, जहां माओवादियों की उपस्थिति है. ऐसे में माओवादी इलाके में ड्रोन के उपयोग के लिये वन विभाग के अमले को गृह विभाग से भी हर बार अनुमति लेनी होगी, जो इतना सरल नहीं होगा.

हालांकि ये पहला अवसर नहीं है, जब वन विभाग में इस तरह की खरीदी की जा रही है. वन विभाग में खरीदी के नाम पर करोड़ों रुपये बर्बाद करने के कई किस्से आम हैं. अधिकारियों और नेताओं की कमीशनखोरी के मामले सामने आते हैं और फिर फाइलों में दफ्न हो कर रह जाते हैं.

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