700 साल पुरानी बीमारी का राज

Wednesday, July 16, 2014

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जीन

लंदन | एजेंसी: अत्याधुनिक ‘शॉटगन’ तकनीक के जरिए शोधकर्ताओं ने मियादी बुखार के लिए जिम्मेदार विषाणुओं का जिनोम प्राप्त कर लिया है. उल्लेखनीय है कि किसी जीवाणु का जिनोम उससे उत्पन्न रोग के निदान की खोज करने में सहायक होता है.

शोधकर्ताओं ने इटली के एक मध्यकालीन गांव से मिली 700 साल पुराने मानव कंकाल से मियादी बुखार पैदा करने वाले जीवाणु ब्रुसीला मेलिटेंसिस का जिनोम खोज निकाला. मियादी बुखार या ब्रुसिलोसिस मनुष्यों व मवेशियों में ब्रुसीलोसिस संक्रमण के लिए जिम्मेदार है.

शोधकर्ताओं के अनुसार, मियादी बुखार फैलाने वाले ये जीवाणु जिसे गेरिडू-1 भी कहते हैं, मौजूदा समय में मियादी बुखार के लिए जिम्मेदार जीवाणुओं ईथर से काफी हद तक संबंधित हैं.

ईथर की पहचान 1961 में इटली में की गई थी, तथा इटली में ही मियादी बुखार पैदा करने वाले दो अन्य जीवाणुओं की पहचान 2006 और 2007 में की गई थी.

इटली के तटीय इलाके पर स्थित द्वीप सरडिनीया के गेरीडू से मिले एक मध्यकालीन पुरुष के कंकाल से प्राप्त गुणसूत्रों की संरचना का अध्ययन करने के लिए वैज्ञानिकों ने जिस तकनीक का इस्तेमाल किया, उसी को ‘शॉटगन मेटाजिनोमिक्स’ कहते हैं.

ब्रिटेन के कोवेंट्री स्थित वारविक मेडिकल स्कूल के माइक्रोबियल जिनोमिक्स के प्राध्यापक मार्क पालेन कहते हैं, “साधारणतया जब आप मानवों या जानवरों के अवशेषों में कैल्सिफाइ सामग्री देखते हैं, तो आपका दिमाग सीधे तपेदिक की तरफ जाता है, क्योंकि यह संक्रमण कैल्सिफिकेशन का एक मुख्य कारण है. लेकिन इसकी बजाय हम ब्रुसीला पाने पर हैरान थे.”

ब्रुसीला मेलिटेंसिस जीवाणु मनुष्यों और मवेशियों में मियादी बुखार का संक्रमण फैलाते हैं. मानवों में यह बीमारी दूषित दुग्ध पदार्थ खाने या संक्रमित जीवों से भी होता है.

शोध पत्रिका ‘एमबायो’ में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, भूमध्य क्षेत्रों में यह बीमारी अभी भी होती है.

पालेन की टीम अब इस तकनीक का हंगरी और मिस्र की ममी समेत कई अन्य नमूनों पर इस्तेमाल कर रही है.

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