AAP पर ‘व्यक्तिवाद’ हावी: योगेंद्र यादव

Friday, April 10, 2015

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योगेंद्र यादव

लखनऊ | समाचार डेस्क: केजरीवाल से खफ़ा योगेन्द्र यादव स्वराज आंदोलन शुरु करने जा रहें हैं. योगेन्द्र ने बताया कि इस मुहिम में उनके साथ मेघा पाटकर तथा प्रशांत भूषण साथ हैं. योगेन्द्र यादव ने इसारों में केजरीवाल का नाम लेते हुये कहा कि कुछ लोग पार्टी को गलत दिशा में ले जा रहें हैं. दिल्ली में बहुमत की सरकार बनाने वाली आम आदमी पार्टी के असंतुष्ट नेता योगेंद्र यादव ने यहां गुरुवार को कहा कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि जनांदोलन से निकली पार्टी का अंत ‘व्यक्तिवाद’ पर होगा. उन्होंने कहा कि असंतुष्ट विधायकों को लामबंद कर वह पार्टी को तोड़ने का प्रयास नहीं करेंगे. अपने समर्थकों से मिलने लखनऊ पहुंचे योगेंद्र ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि 14 अप्रैल को गुड़गांव में स्वराज संवाद की शुरुआत होगी, जिसमें प्रमुख रूप से मेधा पाटेकर, शांति भूषण सहित कई लोग मौजूद रहेंगे.

उन्होंने कहा, “हम स्वराज के लिए निकले हैं. हम निकले हैं राजनीति की चाल, चरित्र और चेहरा बदलने के लिए और इस दिशा में हमारी मुहिम जारी रहेगी.”

योगेंद्र ने कहा, “आंदोलन से निकली पार्टियों का बुरा हश्र होते हमने देखा है. समाजवादी पार्टी लोहिया के विचारों को लेकर आगे बढ़ी थी, लेकिन बाद में उसका हश्र क्या हुआ, यह सभी जानते हैं. आज सपा से जिस तरह के लोग जुड़े हैं, उससे शर्म आती है. उसी तरह जिस सोच के साथ बहुजन समाज पार्टी बनी थी, आज वहां भी व्यक्तिवाद हावी है. इसी सब के खिलाफ तो आप खड़ी हुई थी.”

यह पूछे जाने पर कि क्या आम आदमी पार्टी के टूटने का खतरा पैदा हो गया है, तो उन्होंने कहा, “दिल्ली में हम विधायकों को नहीं तोड़ेंगे. हम जोड़ने में विश्वास करते हैं, तोड़ने में नहीं. हमारी लड़ाई व्यक्तिवाद से थी और रहेगी. ”

असंतुष्ट नेता ने कहा कि उन्होंने ‘स्वराज संवाद’ के नाम से एक फोरम की शुरुआत की है. इससे अभी तक लगभग तीन हजार लोग जुड़ चुके हैं. अकेले उत्तर प्रदेश से करीब 661 लोग इससे शामिल हुए हैं.

योंगेद्र ने कहा, “कुछ लोग पार्टी को गलत दिशा में ले जा रहे हैं. जिस सोच के साथ आम आदमी पार्टी बनी थी, आज वह दिखाई नहीं देती. यहां भी व्यक्तिवाद हावी हो गया है.” उनका इशारा पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की ओर था.

उन्होंने कहा, “हमारी कोशिश है कि आम आदमी पार्टी जिस आंदोलन से निकली थी और जिन मूल्यों को लेकर वह आगे बढ़ी थी, वह पीछे न छूटने पाए. आज पार्टी के भीतर जो कुछ हो रहा है, वह पार्टी के संविधान के खिलाफ है और हम उसके खिलाफ अपनी लड़ाई लड़ते रहेंगे.”

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