कलेक्टर ने उखड़वाये 60 हज़ार पौधे

Wednesday, July 22, 2015

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कोरबा में पौधारोपण

कोरबा | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के कोरबा में 60 हज़ार से अधिक सागौन के हजारों पौधों को प्रशासन ने उखाड़ दिया है. ये पौधे वन विभाग ने लगवाये थे. इस मामले में कलेक्टर ने आगे अब नोटिस जारी करने की बात कही है. वहीं वन विभाग, प्रशासन की इस कार्रवाई से सकते में है. वन विभाग के अधिकारियों को समझ नहीं आ रहा है कि 60 हजार से भी अधिक पौधे रोपित करने के लिए वह कौन-सी नई जगह तलाश करे. ज़़िले के कलेक्टर का कहना है कि जहां वन विभाग ने पौधे लगाये थे, वहां एल्युमिनियम पार्क बनाया जाना है.

बालको नगर के ग्राम रोगबहरी में खसरा नम्बर 339/1, 2 की लगभग 60 एकड़ भूमि पर वन विभाग ने 62,500 सागौन के पौधे कुछ समय पहले लगाये थे. मंगलवार को मौके पर पहुंची ज़िला प्रशासन की टीम ने पौधों को यह कहते उखाड़ना शुरू कर दिया कि जिस ज़मीन के टुकड़े पर पौधे लगाये गये हैं, वो एल्युमिनियम पार्क के लिए प्रस्तावित है.

दूसरी ओर बालको क्षेत्र के डिप्टी रेंजर एस. डी. फारूखी की माने तो जिस ज़मीन पर पौधा रोपण किया गया था, वो बड़े झाड़ का जंगल यानी राजस्व वनभूमि है. इस भूमि पर पौधारोपण करने के लिए वन विभाग ने बकायदा वर्ष 2014-15 में ग्राम वन समिति से अनापत्ति प्रमाण पत्र भी लिया गया था. इसके बाद लगभग 10 लाख रुपये खर्च करके पौधे लगाये गये. लेकिन पौधे लगाये हुये अभी कुछ ही दिन हुये हैं कि कलेक्टर के आदेश पर ज़िला प्रशासन ने मज़दूरों को लगवा कर सारे पौधे उखड़वा कर फेंक दिये गये.

ज़िले की कलेक्टर रोपित ज़मीन के अलावा आसपास के अन्य 500 एकड़ भूमि पर एल्युमिनियम पार्क बनाये जाने की बात भविष्य में कह रही हैं. जिसके लिए उन्होंने केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के पास भूमि प्रत्यावर्तन का आवेदन भी लगा रखा है. लिहाजा राजस्व वनभूमि पर किए गए रोपण को लेकर कलेक्टर आने वाले दिनों में नोटिस जारी करने की बात कह रही है.

कलेक्टर इस पूरे मामले को संवादहीनता बता रही हैं, जबकि ज़िला प्रशासन व वन विभाग के कार्यालय में डेढ़ किलोमीटर से भी कम की दूरी है. साथ ही अधिकारियों का हर मसले पर चर्चा होना आम बात है क्योंकि हर सप्ताह कलेक्टर जिला अधिकारियों की समय सीमा की बैठक लेती हैं और उनको आवश्यक दिशा निर्देश देती हैं. ऐसे में हजारों पौधे का रोपण करने से पहले वन विभाग ने प्रशासन को जानकारी नहीं दी होगी, यह बात किसी के गले नहीं उतर रही है.

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