अजीत जोगी का अगला कदम?

Thursday, June 2, 2016

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अजीत जोगी-पूर्व मुख्यमंत्री

रायपुर | अन्वेषा गुप्ता: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के अगले राजनीतिक कदम पर सबकी नज़र लगी हुई है. बेटे के निष्कासन के बाद अजीत जोगी के लिये कांग्रेस में करो या मरो की स्थिति बना दी गई है. अब तक कांग्रेस आलाकमान ने छत्तीसगढ़ कांग्रेस की अनुशंसा के अनुसार अजीत जोगी पर अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की हरी झंडी नहीं दी है. परन्तु रायपुर के राजनीतिक गलियारें में इस बात के कयास लगाये जा रहें हैं कि राज्यसभा की वोटिंग के बाद आलाकमान इस पर कोई निर्णय ले सकता है.

यह माना जाता है कि अभी भी छत्तीसगढ़ कांग्रेस के विधायकों पर जोगी का प्रभाव है तथा 8-10 तो उऩके साथ खुलकर आ सकते हैं. जाहिर सी बात है कि कांग्रेस आलाकमान राज्यसभा की वोटिंग के पहले कोई जोखिम लेना नहीं चाहती है.

उधर अजीत जोगी हैं कि उन्होंने अपनी तैयारी कर के रखी है. उनके बेटे तथा कांग्रेस से निष्कासित मरवाही के विधायक अमित जोगी इन दिनों ‘ग्राम आवाज़’ कार्यक्रम में व्यस्त हैं. इसे आसानी से समझा जा सकता है कि बगैर पार्टी के इस तरह से जनता के बीच जाकर कार्यक्रम करना दरअसल अपनी ज़मीनी ताकत को संजोकर रखना ही है.

अपने तीन साल के कार्यकाल में अजीत जोगी ने जितने दुश्मन बनाये उससे ज्यादा उन्होंने अपने समर्थक भी बनाये हैं. जहां कांग्रेस आलाकमान के लिये अजीत जोगी पर अनुशासन की कार्यवाही करने का फैसला लेना आसान नहीं है वहीं अजीत जोगी भी लंबे समय तक उपेक्षा सहकर पार्टी में नहीं रह सकते हैं.

एक दिन पहले ही अजीत जोगी ने एक हिन्दी दैनिक को दिये साक्षात्कार में संकेत दिया है कि वह नई पार्टी का एलान कर सकते हैं. उन्होंने साफ कर दिया है कि वे फैसलै के लिये दिल्ली की दौड़ नहीं लगायेंगे बल्कि छत्तीसगढ़ में ही बैठकर फैसला लेगें. उन्होंने कहा कि उनके 10 लाख समर्थकों के पार्टी सदस्यता के फार्म नहीं लिये गये हैं.

जाहिर है कि अजीत जोगी का दावा है कि राज्य में उनके पास 10 लाख समर्थकों की फौज है. अजीत जोगी एक कुशल प्रशासक, संगठनकर्ता तथा वक्ता है इससे इंकार नहीं किया जा सकता है. परन्तु अंतागढ़ टेपकांड के सामने आने से इसका खुलासा हुआ है कि वे पार्टी से ज्यादा खुद के अहम को ज्यादा महत्व देते हैं.

दूसरी तरफ अंतागढ़ टेपकांड के बाद अजीत जोगी पर अनुशासन की कार्यवाही करने के लिये जो प्रस्ताव आलाकमान को भेजा गया है वह संगठन खेमें के लिये गले की फांस बन गया है. जब तक आलाकमान उस पर फैसला नहीं लेता अजीत जोगी ताल ठोंकते रहेंगे. यदि कड़ा फैसला लिया तो अजीत जोगी छत्तीसगढ़ में एक समानांतर संगठन या पार्टी खड़े करने की ताकत रखते हैं.

अब इससे फायदा भाजपा को होगा या कांग्रेस को यह आने वाले कल के गर्भ में है. बहरहाल, अजीत जोगी के अगले कदम पर सबकी नज़र है. उसी के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति का ऊंट किस करवट बैठेगा उसका अंदाज लगाया जा सकता है.

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को भाजपा से महज 0.75 फीसदी मत ही कम मिले थे. अब यदि अजीत जोगी नई पार्टी बनाते हैं तो यह घटेगी या बढ़ेगी यह भी देखने की बात है.

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