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अकड़े चीन ने कहा-चीन को कुछ भी साबित करने की ज़रूरत नहीं

नई दिल्ली | संवाददाता: चीन ने अकड़ दिखाते हुये कहा है कि जो कुछ भी हुआ है वो एलएसी पर चीन की तरफ़ हुआ है. इसमें चीन को कुछ भी साबित करने की ज़रूरत नहीं है. बीबीसी ने एजेंसी के हवाले से कहा है कि भारत के विदेश मंत्रालय ने चीन का गलवान घाटी पर दावा खारिज करते हुये कहा है कि यह दावा स्वीकार्य नहीं है.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता से पूछा था कि अभी ग्राउंड पर हालात कैसे हैं? ख़ासकर गलवान घाटी की स्थिति क्या है, जहां सब कुछ हुआ है. गलवान घाटी को लेकर अब तक कोई विवाद नहीं था अचानक से यहां समस्या कैसे खड़ी हो गई? अब पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने अपने बयान में कहा है कि गलवान घाटी की संप्रभुता हमेशा से चीन के पास रही है लेकिन इस इलाक़े को लेकर तो अब कोई विवाद नहीं था. आप इस पर क्या कहेंगे?

इन सवालों के जवाब में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता चाओ लिजियान ने कहा, ”आपके पहले सवाल का जवाब है कि भारत और चीन सैन्य और राजनयिक स्तर पर बात कर रहे हैं. तथ्य बिल्कुल सीधा है. जो कुछ भी हुआ है वो एलएसी पर चीन की तरफ़ हुआ है. इसमें चीन को कुछ भी साबित करने की ज़रूरत नहीं है.”

चीनी प्रवक्ता ने कहा कि ”दोनों देशों के सैनिक ग्राउंड पर ख़ास मसलों को हल करने की कोशिश कर रहे हैं. मेरे पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है जिसे यहां जारी करूं. मेरा मानना है और आपने भी इसे देखा होगा कि जब से यह हुआ है तब से दोनों पक्ष बातचीत के ज़रिए विवाद को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि सरहद पर शांति बहाल हो सके.”

इसी तरह समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने चाओ लिजियान से पूछा कि जब चीन और भारत में मसले को बातचीत के ज़रिए सुलझाने की सहमति बन गई थी तब भी यहां तनाव की स्थिति क्यों है? हालात को नियंत्रण में रखने की ज़िम्मेदारी किसके पास है, विदेश मंत्रालय के पास या सेना के पास?

इस सवाल के जवाब में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ”सीमा पर तनाव कम करने के लिए चीन और भारत राजनयिक और सैन्य स्तर पर बात कर रहे हैं. छह जून को दोनों पक्षों में कमांडर स्तर की बात हुई थी. इस बातचीत में दोनों देश सहमति पर पहुंचे थे कि शांतिपूर्ण तरीक़े से समाधान तक पहुंचना है. लेकिन अचानक से 15 जून को भारतीय सैनिकों ने सहमति का उल्लंघन किया और अवैध गतिविधियों के लिए एलएसी पार हो गए. इन्होंने चीनी सैनिकों को उकसाया और हमला किया. यही वजह रही कि दोनों पक्षों के बीच हिंसक झड़प हुई.”

चीन के प्रवक्ता ने कहा “चीन ने इसे लेकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है और कहा है कि भारत अपने सैनिकों को सख़्ती से रोके. कोई भी एकतरफ़ा कार्रवाई फिर से हुई तो मामला और जटिल होगा. चीन और भारत इस बात पर सहमत हैं कि संवाद के ज़रिए विवादों का समाधान खोजा जाएगा. चीन और भारत राजनयिक और सैन्य दोनों स्तरों पर बात कर रहे हैं.”

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