क्या चीनी सेना बेलगाम है?

Tuesday, September 23, 2014

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शी जिनपिंग-चीनी सेना

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सोमवार को चीनी सेना के मुख्यालय से वफादार रहने के लिये कहा है. भारत-चीन सीमा पर जारी ताजा विवाद के बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के इस कथन से माना जा रहा है कि यह चेतावनी उन्होंने लाल सेना को भारतीय सीमा में अतिक्रमण करने के लिये दिया है. गौरतलब है कि चीनी सेना ने भारतीय सीमा के भीतर घुसकर अपने टेंट गाड़ दिये हैं. सोमवार को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बीजिंग में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के जनरलों के मीडिंग में यह बात कही है. शी जिनपिंग की भारत यात्रा के समय भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने अनका ध्यान इस ओर आकर्षित किया था कि चीनी सेना भारत में घुसपैठ कर रही है. जाहिर सी बात है कि चीनी व्यापार को बढ़ाने के लिये भारत आये तथा अपने पुराने प्रतिद्वंदी जापान के प्रभाव को कम करने के लिये आये शी जिनपिंग को यह बात नागावर गुजरी कि उनके दिल्ली प्रवास के दौरान भी चीनी सेना ने अपनी भारत विरोधी गतिविधी जारी रखी थी.

उल्लेखनीय है कि चीन में वहां का सेना जिसे पीपुल्स लिबरेशन आर्मी कहा जाता है शक्ति का एक महत्वपूर्ण केन्द्र है. पाकिस्तान के उलट, चीनी सेना हमेशा से चीनी राजनीतिक पार्टी याने की चीनी कम्युनिस्ट पार्टी तथा वहां के राष्ट्राध्यक्ष के प्रति वफादार रही हैं. चीन में माओ जे दुंग तथा देंग शिआओ पिंग के बाद शी जिनपिंग पहले नेता हैं जो चीनी शासन, कम्युनिस्ट पार्टी तथा पीसुल्स लिबरेशन आर्मी के प्रमुख हैं. उनके पूर्वर्ती हू जिन्ताओ को भी तीनों अधिकार एक साथ प्राप्त नहीं हुए थे.

दुनिया भर में चीन की सेना को सबसे राजनीति रूप से सचेतन माना जाता है. इसकी स्थापना चीन के चेयरमैन माओ जे दुंग ने की थी तथा इसी की बदौलत चीन ने जापान को खदेड़कर एक स्वतंत्र कम्युनिस्ट देश के रूप में अपने को स्थापित किया है. जाहिर है कि राजनीतिक सेना मौका मिलने पर अपनी राजनीति समझ के अनुसार काम करने से नहीं चूकने वाली है. इसके बावजूद भी चीनी सेना को पाकिस्तान के सेना के समान तख्तापलट करने वाला नहीं माना जाता है. चीन की कम्युनिस्ट पार्टी में माओ के समय से पीपुल्स लिबरेशन आर्मी का दबदबा रहा है.

सोमवार को चीनी सेना के जनरलों के साथ अपनी बैठक में राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी से कहा कि इस बात का धयान रखा जाये कि चीनी सेना कम्युनिस्ट पार्टी तथा शासन के निर्णयों का पालन करें तथा केन्द्रीय नेतृत्व के निर्देशों का परी तरह से पालन करें. इसके अलावा उन्होंने चीनी सेना को आघाह किया है कि सूचना तकनीक के युग में छेत्रीय युद्ध में जीत हासिल करने की दक्षता प्राप्त करें. हालांकि, उनके इस कथन से दूसरे अर्थ भी निकाले जा सकते हैं परन्तु एक सेना प्रमुख अपनी सेना से युद्ध के लिये तैयार रहने के अलावा और क्या बात करेगा?

इससे एक दिन पहले रविवार को चीनी सेना के चीफ ऑफ स्टाफ की मीटिंग हुई जिसमें नये हालात में किस प्रकार से कमान की दक्षता को बनाये रखा जाये उस पर चर्चा हुई. राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सेना के जनरलों से कहा कि अंतर्राष्ट्रीय तथा देश की सुरक्षा से संबंधित बातों पर बेहतर समझ विकसित करें. इससे अंदाज लगाया जा सकता है कि चीनी सेना की समझदारी पर उन्हें पूरा विश्वास नहीं है.

शी जिनपिंग ने सेना के जनरलों से कहा कि सेना को अपने आप को अनुशासित करना पड़ेगा तथा राष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान पड़ेगा. सेना की बैठक में कहा गया कि सेना राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आदेशों का पालन करें.

चीनी सेना के प्रमुखों के साथ राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक का ब्यौरा चीन के आधिकारिक अखबार ने दिया है. आने वाला समय यह साबित करेगा कि क्या चीनी सेना, भारत में घुसपैठ करने से बाज आती है या चीनी अखबार महज खानापूर्ति कर करें हैं.

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