गर्म कपड़ों की मांग बढ़ी

Monday, November 11, 2013

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गर्म कपड़े

रायपुर | एजेंसी: छत्तीसगढ़ में ठंड का मौसम शुरू होते ही बाजारों में गर्म कपड़ों की मांग अचानक बढ़ गई है. ठंड की वजह से राजधानी रायपुर के व्यवसायियों ने भी बड़ी मात्रा में गर्म कपड़ों का स्टॉक दशहरा के बाद से ही मंगवा लिया था. पिछले साल की तरह इस बार भी राजधानी में गर्म कपड़ों का तिब्बती बाजार भी सज गया है. बाजार में आकर्षक स्वेटर, जैकेट सज गए हैं.

बाजारों में बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए गर्म कपड़े उपलब्ध हैं. इस बार स्वेटर की अपेक्षा जैकेट की मांग ज्यादा देखी जा रही है. जैकेट की मांग युवाओं के साथ-साथ युवतियों को बीच भी बढ़ गई है.

बाजार से मिल रहीं जानकारियों के मुताबिक, आकर्षक जैकेट व स्वेटर की मांग ज्यादा है. अब तो पुलोवर की मांग भी बढ़ रही है. पुलोवर में टोप भी लगा रहता है, जो युवाओं को विशेष लुक प्रदान करता है, और इसी वजह से पुलोवर की मांग युवाओं में काफी ज्यादा है.

लोग अपने पूरे परिवार के लिए गर्म कपड़े खरीद रहे हैं. छत्तीसगढ़ में ठंड का सीजन अमूमन फरवरी माह तक रहता है, लेकिन 15 जनवरी तक गर्म कपड़े का मांग बनी रहती है.

इस बार गर्म कपड़ों की कीमत में 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी भी हुई है. जैकेट 300 से लेकर 3,000 रुपये तक की रेंज में उपलब्ध है. बच्चों की जैकेट 200 रुपये से 1,200 रुपये तक में बिक रही है. वहीं स्वेटर 500 से 5,000 रुपये तक की कीमत में बिक रहा है. पुलोवर 400 से 1,000 रुपये में बिक रहा है.

राजधानी के कपड़ा व्यवसायी विशाल मोटवानी, गोविंद यादव और रवि बुधवानी ने कहा कि ठंड शुरू होते ही गर्म कपड़े की मांग बाजार में बढ़ गई है. ठंड से बचाव के लिए गर्म कपड़े की खरीदारी के लिए लोगों का पहुंचना शुरू हो गया है. गर्म कपड़े का भरपूर स्टॉक मंगवाया गया है. परिवहन किराया में बढ़ोतरी की वजह से गर्म कपड़े की कीमत में इस बार भी बढ़ोतरी हुई है.

व्यवसायी पूनम देवांगन, रतिराम देवांगन और नरेश मोटवानी ने कहा कि इस बार भी गर्म कपड़े के कीमत में बढ़ोतरी जरूर हुई है, फिर भी इसकी बिक्री प्रभावित नहीं होगी. जैकेट के साथ पुलोवर की मांग भी ज्यादा है.

यहां के तिब्बती बाजार में भी लोगों की भीड़ देखी जा रही है. बाजार में जैकेट खरीदने पहुंची युवती शर्मिला यदु ने बताया कि इस बार वह जैकेट ही लेंगी, क्योंकि इससे ठंड से बचने के साथ-साथ लुक भी बढ़िया रहता है.

पहले जहां ऊन से घरों पर ही स्वेटर बनाए जाते थे, लेकिन जब से रेडीमेड स्वेटर का प्रचलन बढ़ा है, तब से हाथ से बनाए जाने वाले स्वेटर की मांग लगभग खत्म हो गई है. पहले ऊन फेरीवाले भी शहर के साथ गांव में जाते थे लेकिन अब वे भी दिखाई नहीं पड़ते हैं. दुकानों में भी ऊन की बिक्री काफी प्रभावित हुई है. व्यवसायी टुकेश देवांगन, पप्पू मोटवानी ने कहा अब ऊन की बिक्री नहीं होती है.

बहरहाल, चुनावी सरगर्मी के बीच राजधानी रायुपर सहित समूचे सूबे में गर्म कपड़ों का बाजार सज गया है, व्यापारियों को भी उम्मीद है कि इस बार अच्छा व्यवसाय होगा.

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