सुब्रत रॉय के खिलाफ गैर-जमानती वारंट

Wednesday, February 26, 2014

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सहारा समूह प्रमुख सुब्रत रॉय

नई दिल्ली | एजेंसी: सहारा प्रमुख सुब्रत राय के सर्वोच्च न्यायालय में व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित नहीं होने के कारण सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को उनके विरुद्ध गैर-जमानती वारंट जारी किया और अदालत के आदेश का पालन करने के लिए चार मार्च तक की मोहलत दी.

अदालत की पिछली सुनवाई में राय को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था, लेकिन वह पेश नहीं हुए थे.

न्यायमूर्ति के. एस. राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति जे.एस. खेहर ने सुनवाई के दौरान कहा, “चूंकि हम 25 फरवरी को व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट की मांग करने वाली उनकी याचिका रद्द कर चुके हैं, इसलिए आज दोबारा इस अनुरोध को स्वीकार करने का हमें कोई कारण नजर नहीं आता है.”

न्यायाधीश के.एस राधाकृष्णन ने नाराजगी के साथ कहा, “इस अदालत के हाथ बहुत लंबे हैं. हम वारंट जारी करेंगे. यह इस देश का सर्वोच्च न्यायालय है. जब अन्य निदेशक यहां हैं, तो वे यहां क्यों नहीं हैं?”

अदालत ने कहा, “हम सुब्रत राय सहारा को गिरफ्तार करने के लिए गैर जमानती वारंट जारी करते हैं. उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा और चार मार्च को दो बजे दिन में इस अदालत में उनकी पेशी होगी.”

अदालत वरिष्ठ वकील रामजेठमलानी के तर्क से प्रभावित नहीं हुई कि राय की 94 वर्षीय माता की हालत गंभीर है और राय उनके पास रहने के लिए गए हैं. जेठमलानी ने कहा, “उनकी माता मर रही हैं. वह उनके साथ हैं, उनका हाथ थामे हैं.”

जेठमलानी ने कहा कि सुब्रत राय ने ऐसा कुछ भी नहीं किया है, जिससे अदालत को उनके साथ कठोरता दिखानी चाहिए.

सर्वोच्च न्यायालय ने 20 फरवरी को राय को और सहारा इंडिया रियल एस्टेट कारपोरेशन लिमिटेड (एसआईआरईसीएल) तथा सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कारपोरेशन लिमिटेड (एसएचआईसीएल) के तीन निदेशकों-अशोक राय चौधरी, रवि शंकर दूबे और वंदना भार्गव-को 26 फरवरी को अदालत में उपस्थित होने के निर्देश के आलोक में तीनों निदेशकों की उपस्थिति को संज्ञान में लिया.

अदालत ने कहा, “तीनों निदेशक, जो आज उपस्थित हैं, अगली तिथि को भी अदालत में उपस्थिति रहेंगे.”

राय और तीनों निदेशकों को इसलिए व्यक्तिगत रूप से अदालत में पहुंचने का निर्देश दिया गया था, क्योंकि सहारा की कंपनियां निवेशकों से वैकल्पिक रूप से पूर्ण परिवर्तनीय डिबेंचर के जरिए जुटाई गई 24 हजार करोड़ रुपये की राशि में से 19,000 करोड़ रुपये की राशि चुकाने के लिए गारंटी के रूप में सेबी के पास बिना कर्ज वाली संपत्ति का मालिकाना हक जमा करने में असफल रही है.

सहारा ने दिसंबर 2012 में सेबी के पास 5,120 करोड़ रुपये जमा कर दिए थे.

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