सज गई ज़हर की दुकान

Friday, March 21, 2014

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सॉफ्ट ड्रिंक

रायपुर | समाचार डेस्क: ज़हर पीने का शौक़ है तो आप इधर का रुख कर सकते हैं. छत्तीसगढ़ में गर्मी शुरू होते ही राजधानी सहित कुछ और बड़े शहरों-कस्बों की गलियों में ‘जहर’ बिकना शुरू हो गया है. ठेले और छोटी दुकानों में बर्फ के गोले, चुस्की, शर्बत, बादाम, मैंगो शेक, सोडा, आईस्क्रीम जैस पेय 5 से 30 रुपये में बिक रहे हैं. राजधानी में ही ऐसे 2000 से अधिक छोटी-बड़ी दुकानें हैं. यहां रोजाना 5 लाख रुपये का व्यापार होता है. इनमें से अधिकतर दुकानों में शीतल पेय के नाम पर दूषित पानी पिलाया जाता है. शहर में ऐसी दुकानें सज गई है. साइकिल, ठेला एवं अन्य साधनों से गली-गली स्वास्थ्य बिगाड़ने के सामान पहुंच रहे हैं.

गर्मी से राहत पाने और गला तर करने के लिए ऐसे शीतल पेयों को पीने से पहले एक बार देख लें कि आप नकली पेय तो नहीं पी रहे. घटिया खाद्य सामाग्री से ये शीतल पेय आपको अस्पताल भी पहुंचा सकते हैं. रंगीन शीतल पेय ज्यादा खतरनाक माने जाते हैं. फूड की जगह अनेक लोग कपड़े को रंगने वाला आम कलर का भी उपयोग करते हैं. डाक्टर भी ऐसे सामानों को खतरनाक बता रहे हैं.

जिला अस्पताल के डॉ. जे.आर. गुप्ता ने बताया कि अधिक कमाई के चक्कर में दुकानदार गुणवत्ता का खयाल नहीं रखते. ऐसे शीतल पेय स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं.

अरारोट, सोया दूध, सैकरीन, नॉनफूड कलर जैसी सामाग्री से बने पेय लोगों को एलर्जी करते हैं. इससे शरीर के टिशू को नुकसान पहुंचता है और कैंसर तक होने का खतरा रहता है. अधिक समय तक इन शीतल पेयों को रखने से उनमें बैक्टीरिया भी पनपने लगते हैं. आज के समय में ऐसे शीतल पेयों को पीने से पहले गुणवत्ता जरूर देख लें.

हर साल गर्मी में शीतल पेय के नाम पर ‘जहर’ बिकती है. गर्मी बढ़ने पर दुकानों की संख्या और भी बढ़ जाती है. खाद्य एवं औषधि प्रशासन आज तक ऐसे दुकानों में दबिश नहीं देता. कभी किसी ठेले या दुकान में जाकर नमूने लेने का भी प्रयास नहीं हुआ.

स्वास्थ्य, खाद्य विभाग एवं जिला प्रशासन ने कभी इस ओर ध्यान नहीं दिया. शक्कर की जगह अनेक लोग सैकरीन या अन्य घटिया सामाग्रियों का इस्तेमाल करते हैं. बादाम, मैंगो शेक को गाढ़ा करने के लिए अरारोट, कार्ल फ्लोर का उपयोग किया जाता है. दूध की जगह यूरिया एवं सोया से बने दूध का प्रयोग करते हैं. गर्मी से राहत पाने के लिए लोग बेहिचक ऐसे पेयों को पी लेते हैं, लेकिन इसका नुकसान लोगों को बाद में दिखता है.

हालांकि सेनेटरी निरीक्षक उपमन्यु द्विवेदी का कहना है कि समय-समय पर कुछ दुकानों की आकस्मिक जांच पड़ताल की जाती है और खराब गुणवत्ता के पेय पदार्थ मिलने पर कार्रवाई भी होती है.

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