रेलवे को आम जनता से प्यारी कमाई

Friday, March 8, 2013

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रेलवे

बिलासपुर. दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अफसरों की मनमानी चलती रहती तो आने वाले दिनों में लोकल (पैसेंजर) ट्रेनों का परिचालन ही बंद कर दिया जाता. लदान में आई गिरावट की भरपाई के लिए रेल प्रशासन ने पिछले हफ्ते तीन जोड़ी मेमू को रद्द किया, वहीं इस रविवार को कोरबा-रायपुर-कोरबा मेमू रद्द किए जाने का विचार था. लेकिन मामले के सही समय पर प्रकाश में आ जाने से ये फैसला वापस ले लिया गया है.

दरअसल बिलासपुर रेल मंडल को इस वित्तीय वर्ष में 122 मिलियन टन लदान का लक्ष्य मिला है. फरवरी अंत तक 106 मिलियन टन का ही लदान हो सका. लक्ष्य हासिल करने के लिए बिलासपुर डिवीजन को 16 मिलियन टन लदान की जरूरत है, जिसके लिए मालगाडिय़ों का निर्बाध परिचालन अनिवार्य है. रेल प्रशासन ने मालगाडिय़ों को चलाने के लिए ही पैसेंजर ट्रेनों को रद्द करने का फैसला किया था.

बिलासपुर-रायगढ़ (68738), रायगढ़-बिलासपुर (68737), बिलासपुर-गेवरारोड (68734), गेवरारोड-बिलासपुर (68733), बिलासपुर-पेंड्रा (68740), पेंड्रा-बिलासपुर (68739) वो ट्रेनें हैं, जो 3 मार्च से रद्द की गई हैं,  और जिन्हें मार्च के हर रविवार को रद्द रहना था. अब आने वाले रविवार को, यानी 10 मार्च को इन ट्रेनों के अलावा कोरबा-रायपुर (68745)  और रायपुर-कोरबा (68746) मेमू को भी रद्द किया गया था. स्पष्ट है कि आने वाले रविवार से मार्च के हर रविवार को इन 8 मेमू ट्रेनों के स्थान पर मालगाडिय़ां दौड़ाई जानी थीं.

रेल प्रशासन का तर्क है कि रद्द की गई ट्रेनों में नौकरीपेशा वालों का आना-जाना रहता है, इसलिए इन ट्रेनों को रविवार को रद्द करने से विशेष परेशानी नहीं होगी. रेलवे के जानकार बताते हैं कि रेल प्रशासन इसके अलावा और भी पैसेंजर ट्रेनों को रद्द करने की योजना बना रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लदान हो सके. प्रदेश की राजनीति का रेल प्रशासन पर दबाव नहीं के बराबर है, लिहाजा रेल प्रशासन मानकर चल रही थी कि उसकी ज्यादती को लेकर कोई विरोध नहीं होगा. लेकिन अब चल मामला सामने आ चुका है तो रेल प्रशासन को मजबूरन अपना फैसला वापस लेना पड़ा है.

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