रतनपुर में तेन्दुए का खौफ कायम

Friday, February 21, 2014

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रतनपुर का गांव मेण्ड्रापारा

रतनपुर | उस्मान कुरैशी: मां के आंखों के सामने ही मासूम बेटा मौत की आगोश में चला गया. घटना के बाद दर्द दहशत और खौफ में ग्रामीणों जी रहे है. अलाव जलाकर रतजगे करते रातें गुजर रही है. ग्रामीण घरों के आस पास के जंगल में तेन्दुआ की मौजूदगी का एहसास कर रहे है. दहशत इतनी कि दिन में बच्चों को स्कूल भेजने से ग्रामीण घबरा रहे है.

सोमवार की रात रतनपुर नगर पंचायत क्षेत्र के वार्ड 15 मेण्ड्रापारा में तेन्दुआ के हमले में बच्चे की हुई मौत के बाद पुरे क्षेत्र में सन्नाटा पसरा हुआ है. मेण्ड्रापारा स्थित मृतक मासूम बच्चे के घर से रह रह के रूदन की आवाजें फूट पड़ती है. मां के आंखों के सामने ही मासूम बेटा मौत की आगोश में चला गया . मां दौड़ी भी पर बाड़ी की सुरक्षा में लगा कांटों का घेरा सामने आ गया.

बेबस मां मिलापिन बाई कहती है कि बेटे ने पेषाब करने की बात कही तो मै उसे लेकर बाहर आई. वो सामने था मै पीछे थी कि जानवर दौड़ते हुए आया और मेरे आंखों के सामने उसे खींच कर ले गया. . मैं बेटे को बचाने दौड़ी कि सामने रूधना आ गया . मैं कुछ नही कर पायी. फिर बेटी को आवाज दे के बुलाया तब तक सब कुछ खत्म हो चुका था. सारे मोहल्ले के लोगों में सिर्फ कुछ न कर पाने की बेबसी है.

मेण्ड्रापारा के शत्रुहन यादव नाराजगी जताते हुए कहते है कि तीन माह से तेन्दुआ दिखाई पड़ रहा है. वन विभाग अफसरों को सूचना भी दी गई है. वे भी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे. डेढ़ माह पहले लखनी देवी पहाड़ी पर तेन्दुआ ने बच्चे को शिकार बनाया था तभी उसके आदमखोर होने का संदेह जताया था. अधिकारी हमारी बातों को गंभीरता से नही ले रहे है. कोई कार्रवाई नही कर रहे है. इसी का खामियाजा हमे फिर आज एक बच्चे की जान देकर चुकानी पड़ी है. एक दिन पतासाजी कर कि फिर सभी गायब हो गए है.

चकरभाटा थाना क्षेत्र के गांव कया के प्यारे लाल अपने परिवार के साथ मेड्रापारा के समीप जंगल से लगे खेतों में रहकर बीते माह भर से ईट बनाने के काम में लगे है. प्यारे लाल कहते है कि सोमवार के दिन ही षाम 7 बजे के लगभग उसकी 11 साल की बेटी प्रिया ने भी झोपड़ियों के पीछे तेन्दुआ को अपने दानों षावक के साथ देखा था.

प्रिया कहती है कि झोपड़े के पीछे तीनों खड़े थे और घूर घुर कर देख रहे थे. मै देखकर डर गई और पीछे की ओर भागी.प्रिया डर कर चींखते हुए गिर गई. बच्ची की आवाज सुन सभी दौड़े और उसे उठाकर घर लाए. झोपड़ी में आते तक प्रिया डरकर बेहोश हो गई . कुछ समय बाद यहां के लोगों को खबर मिली की तेन्दुआ ने किसी बच्चे का शिकार कर लिया है. इनके बनाए कच्ची ईंटों में तेन्दुआ व उनके षावकों के पैरों के निषान अब भी मौजूद है.

प्यारे लाल कहते है कि मंगलवार की रात भी तेन्दुआ पास के मउहा पेड़ पर दिखा था. हम लोगों ने लाठी पटक कर उसे डरा कर भगाने का प्रयास किया. पर वह हटने का नाम नही ले रहा था. हम यही बिना दरवाजे के घास फूस की छप्पर वाली मिटटी के झोपड़े में अपने बच्चों छोटे छोटे बच्चों के साथ रहते है. सोमवार की घटना के बाद से हमारा परिवार रात में ठीक से सो नही पा रहा है. रात भर आग जला के रतजगा करनी पड़ रही है.

ईट भट्ठे में ही पथेरे का काम कर रहे उत्तम कुमार कहते है कि पहले गांव वाले भरोसा नही करते थें. कहते थे कि दारू पी के बकबक करता है. 15 दिन पहले ही तेन्दुए ने एक बड़े बछड़े कर शिकार किया तब भरोसा किया. कुछ दिनों से लोमड़ी की सुनाई देने वाले आवाजें भी नही आ रही है. आसपास के कुत्ते भी डरे सहमें दिखाई पड़ रहे है.

वे कहते है कि दो दिन से दहशत की वजह से ठीक से सो भी नही पा रहे है. परिवार की चिंता में सारी रात रतजगा करना पड़ रहा है. डर और दहशत इतनी घर कर गई है कि ग्रामीण घटना के बाद से दिन में भी अपने बच्चों को स्कूल नही भेज रहे है.

प्राथमिक षाला मेड्रापारा की प्रधान पाठिका मंजू थवाईत कहती है कि मोहल्ले के 96 बच्चों का स्कूल में दाखिला है. मंगलवार को 11 बच्चे आए वही बुधवार को 30 बच्चों की उपस्थिति रही. वे मानती है कि डर की वजह से स्कूल में बच्चों की उपस्थिति कम है.

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