योजना आयोग का स्थान पीएमओ लेगा?

Monday, December 8, 2014

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पीएमओ- इंडिया

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता: योजना आयोग की शक्तियां पीएमओ के स्थानांतरिक होने जा रही है? कम से कम रविवार को नई दिल्ली में मुख्यमंत्रियों के साथ प्रधानमंत्री मोदी की बैठक से यह बात उभर कर सामने आई है. प्रधानमंत्री मोदी के आरंभिक संबोधन में पर सरकारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि, “उन्होंने तीन टीमों के संयोग के रूप में टीम इंडिया का वर्णन करते हुए कहा कि यह तीन टीम प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री तथा केंद्रीय मंत्रिपरिषद तथा केंद्र एवं राज्यों में नौकरशाही हैं.” इस बयान से जाहिर है कि योजना आयोग के स्थान पर बनने वाली टीम इंडिया में प्रधानमंत्री के जिम्मेदारी के नाम पर निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है.

पहली टीम में प्रधानमंत्री के साथ सभी राज्यों के मुख्यमंत्री होंगे, दूसरी टीम में प्रधानमंत्री के साथ केन्द्रीय मंत्रिपरिषद के मंत्री होंगे तथा तीसरी टीम में प्रधानमंत्री के साथ केन्द्र एवं राज्यों के नौकरशाह होंगे. इनमें से एक मात्र मुख्यमंत्रियों के साथ वाली टीम में प्रधानमंत्री से जुदा राय रखने वाले शख्स हो सकते हैं वहीं, मंत्री परिषद वाली टीम में प्रधानमंत्री के कैबिनेट के सदस्य तथा नौकरशाहों वाली टीम में उन्हें यस सर कहने वाले शामिल होंगे. कुल मिलाकर टीम इंडिया में प्रधानमंत्री का पद सबसे वजनदार बनने जा रहा है.

वैसे भी, अभी भी प्रधानमंत्री ही योजना आयोग का पदेन अध्यक्ष होता है पर समूचा काम-काज योजना आयोग के उपाध्यक्ष द्वारा संचालित होता है. उल्लेखनीय है कि अपने राज्यों के योजनाओँ के लिये मुख्यमंत्री योजना आयोग के उपाध्यक्ष से ही मिला करते हैं. नई टीम इंडिया के बनने के बाद उन्हें देश के प्रधानमंत्री से सीधे तौर पर बात करनी होगी. प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद का मुखिया होता है जो देश को चलाता है. नये योजना आयोग के स्वरूप के संबंध में जो संकेत रविवार को दिया गया है उसके अनुसार प्रधानमंत्री के जिम्मे देश के लिये योजना बनाने तथा उसे लागू करने का काम भी आ जायेगा.

इस तरह से कहा जाये तो हमारा देश केन्द्रीयकरण की ओर पग बढ़ा रहा है जिसमें प्रधानमंत्री के इर्द-गिर्द निर्णय लेने वाली सारी शक्तियां केन्द्रीत होने लगेंगी खासकर योजनाओं के मामले में. विरोध, प्रधानमंत्री का नहीं, निर्णय लेने की प्रक्रियाओं के केन्द्रीकरण से है. लोकतंत्र में निर्णय लेने के अधिकार को विकेन्द्रीकृत किया जाना चाहिये न कि उसे एक बिन्दु पर केन्द्रीत किया जाना चाहिये. यदि प्रधानमंत्री के पास सभी निर्णय लेने के अधिकार केन्द्रीत किया जाने लगे तो अगली मांग होगी कि प्रधानमंत्री का चुनाव भी सीधे जनता के द्वारा किया जाये. जिस तरह से अमरीकी राष्ट्रपति का चुनाव होता है.

प्रधानमंत्री, पीएमओ के माध्यम से काम करते हैं. इस कारण से टीम इंडिया के स्वरूप के बारे में अभी तक जो जानकारी मिली है उससे योजनाओं की योजना तथा उसके लिये फंड देने का काम भी पीएमओ के जिम्मे चले जाने वाला है. विरोध पीएमओ का भी नहीं वरन् लोकतंत्र को विकसित करने का है. ऐसे किसी विकास का फायदा आमजन तक शायद नहीं पहुंच पायेगा जिसे लोकतांत्रिक ढ़ंग से न लिया गया हो.

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