राजनीति के भंवर में भारत रत्न

Thursday, July 25, 2013

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अमर्त्य सेन

नई दिल्ली | एजेंसी: कांग्रेस ने प्रसिद्ध अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन के भारत रत्न को लेकर राजनीति करने का विरोध किया है.

कांग्रेस नेता तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने कहा कि अमर्त्य सेन को अपना विचार वयक्त करने का अधिकार है. उन्होंने सवाल किया, “यह किस तरह की मानसिकता है. या तो आप हमारे साथ रहिए या हमारे विरुद्ध रहिए. यदि आप हमारे विरुद्ध हैं तो आप भारत रत्न के लायक ही नहीं हैं.”

भाजपा के सांसद चंदन मित्र द्वारा नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अमर्त्य सेन से भारत रत्न वापस लिए जाने की मांग पर कांग्रेस ने गुरुवार को इसे देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान का अपमान बताया और तानाशाही वाली मानसिकता की झलक करार दिया. सेन ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध टिप्पणी की थी.

ज्ञात्वय रहे कि अमर्त्य सेन को भारत रत्न पूर्व की राष्ट्रीय जनतांत्रिक सरकार (राजग) ने दिया था, भाजपा जिसकी बड़ी घटक थी.

मनीष तिवारी ने कहा, अमर्त्य सेन ने ऐसा क्या किया है. इस देश में लोगों को अपना विचार रखने की आजादी नहीं है. यह विशुद्ध तानाशाही नहीं तो फिर और क्या है.

अमर्त्य सेन ने एक टीवी साक्षात्कार के दौरान कहा था कि वर्ष 2002 के गुजरात दंगों के दौरान उनके रिकार्ड को देखते हुए वे नहीं चाहते कि मोदी देश के प्रधानमंत्री बनें.

कांग्रेस नेता शकील अहमद ने कहा कि हर नागरिक को अपना विचार रखने की आजादी है. उन्होंने कहा कि सेन का अलंकरण वापस लेने की मांग ‘भारत रत्न का अपमान है’ और उन्होंने भाजपा पर ‘घोर असहिष्णुता’ प्रदर्शित करने का आरोप लगाया.

अहमद ने एक ट्वीट में कहा है, “अमर्त्य सेन मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में नहीं देखना चाहते, उनका दर्जा नीतीश से नीचे रखा है. इस आलोचना के लिए भाजपा उनसे भारत रत्न छीनना चाहती है. क्या यह असहिष्णुता की पराकाष्ठा नहीं है.”

बुधवार को अपने ट्वीट में मित्रा ने कहा था कि आने वाली राजग सरकार सेन से भारत रत्न वापस ले लेगी.

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