नीतीश महागठबंधन विधायक दल के नेता बने

Saturday, November 14, 2015

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नितीश कुमार

पटना | समाचार डेस्क: बिहार में शनिवार को नीतीश कुमार को महागठबंधन विधायक दल का नेता चुन लिया गया. राजधानी पटना में जनता दल युनाइटेड, कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के नवनिर्वाचित विधायकों ने एक संयुक्त बैठक में औपचारिक रूप से नीतीश कुमार को सर्वसम्मति से महागठबंधन विधायक दल का नेता चुना.

महागठबंधन विधायक दल की बैठक के बाद जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने बताया कि महागठबंधन विधायक दल की बैठक में शामिल पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने नीतीश कुमार के नाम का प्रस्ताव रखा और कांग्रेस महासचिव सी़ पी़ जोशी ने इसका समर्थन किया.

महागठबंधन के एक नेता ने बताया कि नीतीश कुमार अब शनिवार शाम राज्यपाल रामनाथ कोविंद से मुलाकात कर बिहार में सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे.

इससे पहले जदयू विधायक दल की बैठक में नीतीश कुमार को जदयू विधायक दल का नेता चुना गया.

बैठक के बाद जदयू के प्रवक्ता संजय सिंह ने बताया कि जदयू विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से नीतीश कुमार को एक बार फिर नेता चुना लिया गया. उन्होंने बताया कि बैठक में नीतीश कुमार के नाम का प्रस्ताव जदयू के वरिष्ठ नेता बिजेंद्र यादव ने रखा जिसका समर्थन श्याम रजक ने किया.

इधर, जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार को औपचारिक रूप से जदयू विधायक दल का नेता चुन लिया गया.

इससे पहले मुख्यमंत्री नीतीश ने राजभवन जाकर राज्यपाल से मुलाकात की और उन्हें अपना इस्तीफा सौंपने की औपचारिकता पूरी की तथा 15वीं विधानसभा भंग करने की अनुशंसा की.

राज्यपाल कोविंद से मुलाकात के बाद नीतीश ने संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने राज्यपाल से मिलकर उन्हें अपना इस्तीफा सौंप दिया और 15वीं विधानसभा भंग करने के राज्य मंत्रिमंडल के फैसले से अवगत कराया. राज्यपाल ने उन्हें राज्य में नई सरकार बनने तक मुख्यमंत्री पद पर बने रहने को कहा है.

इससे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में यहां मंत्रिमंडल की बैठक हुई, जिसमें राज्यपाल से 15वीं विधानसभा को भंग करने की अनुशंसा से संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दी गई.

नीतीश 20 नवंबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं. उनके साथ 36 सदस्यीय मंत्रिपरिषद के सदस्य भी शपथ लेंगे.

उल्लेखनीय है कि 243 सदस्यीय राज्य विधानसभा के चुनाव में महागठबंधन में शामिल राष्ट्रीय जनता दल 80 सीटों पर जीत के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है, जबकि जदयू ने 71 सीटों पर जीत दर्ज की है और कांग्रेस के खाते में 27 सीटें आई हैं.

जदयू सूत्रों के अनुसार, मंत्रिमंडल में 16 मंत्री लालू प्रसाद के राजद से, 15 मंत्री जदयू से और पांच मंत्री कांग्रेस से होंगे.

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