कलाम की परिकल्पना है नया नालंदा विश्वविद्यालय

Monday, September 1, 2014

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नालंदा विश्वविद्यालय

पटना | एजेंसी: संपूर्ण विश्व में शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में पहचान बनाने वाले नालंदा विश्वविद्यालय की परिकल्पना आज हकीकत बन गई. करीब 800 वर्ष पूर्व विदेशी आक्रमणकारियों के हमले में तबाह हो गए इस विश्वविद्यालय को अब नए रंग-रूप में शुरू किया गया है.

प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की तर्ज पर अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना करने का सपना भले ही पूरा हो गया हो, परंतु इसकी परिकल्पना करने वाले पूर्व राष्ट्रपति ए़ पी़ ज़े अब्दुल कलाम को इसका श्रेय जाता है. 28 मार्च 2006 को कलाम ने अपने बिहार दौरे के क्रम में प्राचीन विश्वविद्यालय को पुनर्जीवित करने की सलाह दी थी. यह विचार उन्होंने बिहार विधानमंडल के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए रखा था.

तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस परिकल्पना को सच करने के लिए काफी प्रयास किया और आज नालंदा की धरती एक बार फिर अपने स्वर्णिम इतिहास को दोहरा रही है.

भारत सरकार ने वर्ष 2007 में नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन के नेतृत्व में नालंदा मेंटर ग्रुप का गठन किया. इस ग्रुप में चीन, सिंगापुर, जापान और थाईलैंड के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया, जिससे इस विश्विद्यालय की अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी विकसित की जा सके. कालांतर में इस मेंटर ग्रुप को ही विश्वविद्यालय की संचालन समिति के रूप में बदल दिया गया.

इस समय तक इस विश्वविद्यालय की परिकल्पना धरातल में आने को लेकर लोगों में विश्वास जगा चुका था और विदेशों से भी सहयोग प्राप्त होने लगा. जापान और सिंगापुर ने विश्वविद्यालय की अधिसंरचना के लिए मदद दी.

राज्यसभा में नालंदा विधेयक, 2010 को 21 अगस्त 2010 को पेश किया गया और यह पास हो गया. यह विधेयक उसी वर्ष लोकसभा में पास होने के बाद राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए लाया गया और राष्ट्रपति ने 21 सितंबर 2010 को इस विधेयक पर अपनी सहमति दे दी. इसी वर्ष 25 नवंबर को नालंदा अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय अस्तित्व में आ गया.

फरवरी 2011 में डॉ़ गोपा सब्बरवाल को कुलपति नियुक्त किया गया. विश्वविद्यालय में सोमवार से पहला शैक्षिक सत्र शुरू हो गया.

विश्वविद्यालय की संकायाध्यक्ष अंजना शर्मा ने बताया कि इस विश्वविद्यालय में पढ़ाने वाले प्राध्यापकों का चयन हो गया है. पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पुत्री उपिंदर कौर भी छात्रों को पढ़ाएंगी. वह इस समय दिल्ली विश्वविद्यालय में इतिहास पढ़ाती हैं.

उन्होंने बताया कि पहले सत्र में इतिहास और पर्यावरण विज्ञान की पढ़ाई होगी. इसके बाद लैंग्वेज एंड लिटरेचर, इंटरनेशनल रिलेशन एंड पीस स्टडीज, बुद्धिस्ट स्टडीज, फिलॉसफी एंड कॉम्परेटिव रिलिजन, इन्फॉर्मेशन साइंस एंड टेक्नोलॉजी तथा बिजनेस मैनेजमेंट की भी पढ़ाई होगी.

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