इराक: लापता भारतीयों की तलाश- सुषमा

Friday, November 28, 2014

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सुषमा स्वराज-विदेश मंत्री

नई दिल्ली | एजेंसी: गोली से मरने के तमाम दावों के बीच भारत सरकार इराक में लापता भारतीयों की तलाश जारी रखेगी. केंद्र सरकार ने शुक्रवार को कहा कि इराक में लापता भारतीयों को लेकर उसने उम्मीद नहीं छोड़ी है और अब तक उनकी हत्या की पुष्टि नहीं हुई है. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि एक बंधक हरजीत बस्सी अपहरणकर्ताओं के चंगुल से निकलने में कामयाब रहा और उसने यह दावा किया है कि अन्य बंधकों को जंगल में ले जाकर गोली मार दी गई है.

उन्होंने कहा, “बस्सी ने कहा कि उसे और अन्य लोगों को जंगल ले जाकर गोली मार दी गई. सिर्फ मैं बच पाया.”

सुषमा ने कहा, “बस्सी की बातों में विरोधाभास है. तार्किक रूप से देखें तो उसकी बातें स्वीकार्य नहीं हैं. हमें छह ऐसे सूत्र मिले हैं, जिनका कहना है कि भारतीयों की हत्या नहीं हुई है.”

गौरतलब है कि इस्लामिक स्टेट ने करीब 40 भारतीय नागरिकों को अगवा कर लिया है, जो अब तक लापता हैं. वे मोसुल में तुर्की की एक निर्माण कंपनी में काम करते थे.

पंजाब के गुरदासपुर से ताल्लुक रखने वाले बस्सी ने बताया था कि बंधकों में वह भी शामिल था. अन्य भारतीय बंधकों को गोली मार दी गई थी, जबकि सिर्फ वह बच निकलने में कामयाब रहा. अधिकारियों ने हालांकि, उसके बयान को विरोधाभाषी बताया है.

सुषमा ने कहा, “उसकी कहानी सुनकर तलाश बंद करने का विकल्प मौजूद है, जबकि उसके विरोधाभाषी बयान के कारण दूसरा विकल्प यह है कि हम इसे नहीं स्वीकारेंगे और तलाश जारी रखेंगे. तर्क यह कहता है कि हम उसके बयान को स्वीकार नहीं करेंगे और तलाश जारी रखेंगे.”

मंत्री ने कहा कि बस्सी फिलहाल भारत सरकार के सुरक्षा घेरे में है.

उन्होंने कहा, “हमें न सिर्फ मौखिक, बल्कि लिखित संदेश भी मिले हैं, जिसमें उनके जिंदा होने की बात कही गई है.”

सुषमा ने हालांकि, लिखित संदेश का खुलासा नहीं किया. उन्होंने हालांकि यह लिखित संदेश अपने सहयोगियों- वित्त मंत्री अरुण जेटली और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हरसिमरत कौर बादल को दिखाने की बात कही.

सुषमा ने कहा कि इराक में अरबी भाषा के अच्छे जानकार अधिकारियों को नियुक्त किया गया है.

उन्होंने कहा, “उम्मीद की खातिर हमें तलाश जारी रखनी है. हमने उन सभी देशों, नागरिकों और संस्थाओं से संपर्क कर रखा है, जिससे हम संपर्क बना सकते हैं.”

सुषमा ने बताया कि रेड क्रिसेंट नाम की संस्था सरकार की मदद कर रही है और किसी व्यक्ति के नाम का खुलासा सुरक्षा कारणों से नहीं किया जा सकता.

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